ब्लाक अकबरपुर में विभिन्न विषयों पर आयोजित हुआ विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर
अम्बेडकर नगर।उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लान ऑफ एक्शन 2025-26 के निर्देशानुसार 21. 01.2026 को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, उपभोक्ता अधिकार एवं उपभोक्ता संरक्षण, स्थायी लोक अदालत की जनोपयोगी सेवायें, मध्यस्थता का महत्व एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सम्बन्ध में विधिक साक्षरता / जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ड्वाकरा हाल विकासखण्ड अकबरपुर, अम्बेडकरनगर में किया गया। उक्त विधिक साक्षरता / जागरुकता शिविर में भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता, अपर जिला जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, में राजेन्द्र कुमार तिवारी, खण्ड विकास अधिकारी, अकबरपुर, सुनील कुमार श्रीवास्तव, ए०डी०ओ० पंचायत, राजेश कुमार तिवारी, डिप्टी चीफ, एल०ए०डी०सी०एस०, शरद पाण्डेय, सहायक, एल०ए०डी०सी०एस०,राजीव सिंह, अधिवक्ता मध्यस्थ, जि०वि० से०प्रा० के कर्मचारी, पीएलवी एवं विकासखण्ड के कर्मचारी व आमजन उपस्थित आये। भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता, अपर जिला जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत कैम्पेन के विषय में बताया गया कि केन्द्र सरकार द्वारा बाल विवाह को समाप्त करने का निर्णय लिया है एवं इस हेतु नालसा द्वारा जारी निर्देशों के कम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 100 दिवसीय विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, बाल विवाह को रोकने के लिये हमें व्यापक जागरूकता फैलानी है। साथ ही अपर जिला जज / सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 01 जनवरी 2026 से दिनांक 31 जनवरी 2026 तक चलने वाले मध्यस्थता अभियान 2.0 के बारे में भी बताया गया कि अभियान के अंतर्गत पारिवारिक, चेक बाउन्स के मामले एवं सुलह समझौता के माध्यम से निस्तारित होने योग्य अन्य समस्त मामले जो जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर के विभिन्न न्यायालयों द्वारा मध्यस्थता केन्द्र, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर में सुलह समझौता हेतु प्रेषित किये जायेंगे में पक्षकारों के मध्य सुलह समझौता की कार्यवाही अधिवक्ता मध्यस्थों द्वारा की जायेगी। राजेन्द्र कुमार तिवारी, खण्ड विकास अधिकारी, अकबरपुर द्वारा शासन की आमजन के कल्याणार्थ संचालित जनोपयोगी एवं जनकल्याणकारी योजनाओं एवं आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की गयी। मंगलमणि पाठक, पी०एल०वी०, द्वारा बताया गया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22बी के अंतर्गत अंतर्गत गठित स्थायी लोक अदालत में यातायात सेवाओं से सम्बन्धित विवाद, डाकघर या टेलीफोन सेवाओं से सम्बन्धित विवाद, बिजली प्रकाश या जलसेवा से सम्बन्धित विवाद, लोक सफाई व स्वच्छता प्रणाली से सम्बन्धित विवाद, अस्पताल या औषधालय में सेवाओं से सम्बन्धित विवाद, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं, शिक्षा एवं शिक्षण संस्थान, हाउसिंग एवं स्टेट से सम्बन्धित्त विवाद एवं बीमा सेवाओं से सम्बन्धित विवादों का निस्तारण सुलह-समझौता के आधार पर किया जाता है। शरद पाण्डेय, सहायक, एल०ए०डी०सी०एस० द्वारा लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल की कार्यप्रणाली एवं दी जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता तथा उपभोक्ता अधिकार एवं उपभोक्ता संरक्षण के अंतर्गत बताया गया कि आनलाईन शापिंग में आपको खरीदे गये सामान की डिलिवरी नहीं की जाती है या आपको खराब सामान भेज दिया जाता है एवं जिसकी शिकायत करने के बाद भी कंपनी वाले आपकी शिकायत को अनदेखा कर आपको सही सामान उपलब्ध नहीं कराते, तो आपके पास विकल्प है कि आप उस कंपनी को अपने अधिवक्ता के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजवा सकते हैं एवं उक्त नोटिस का जवाब प्राप्त नहीं होता है तो उस कम्पनी के विरुद्ध उपभोक्ता फोरम के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत निवारण उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित्त और सरल समाधान के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग स्थापित किए गए हैं। उपभोक्ताओं के लिये शिकायती हेल्पलाईन नं० 1800114000 एवं 1915 व साइबर काइम हेल्पलाईन नं० बारे में बताया गया तथा साइबर काइम एवं डिजिटल अरेस्ट आदि के विषय में भी उपयोगी जानकारी दी गई। राजेश कुमार तिवारी, डिप्टी चीफ, एल०ए०डी०सी०एस० द्वारा बताया गया कि भारत में विवाह की कानूनी उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 10 वर्ष निर्धारित है, इस कानूनी उम्र से कम आयु में किया गया विवाह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो बच्चों (खासकर लड़कियों) के शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास में बाधा डालता है, उन्हें हिंसा और शोषण के प्रति संवेदनशील बनाता है, और गरीबी व कुपोषण के चक्र को बढ़ावा देता है. इसलिए यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के साथ साथ एक दंडनीय अपराध भी है।राजीव सिंह, अधिवक्ता मध्यस्थ, द्वारा बताया गया कि मध्यस्थता प्रक्रिया पारंपरिक अदालती मुकदमों की तुलना में विवादों को सुलझाने का एक तेज, किफायती और अधिक लचीला तरीका प्रदान करती है, समय और लागत की बचतरू अदालती मामलों में अक्सर लंबा समय और पैसा खर्च होता है, मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का जल्द निपटारा हो जाता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है, मध्यस्थता की कार्यवाही गोपनीय होती है, इसमें हुई बातचीत या खुलासे सार्वजनिक नहीं किए जाते, मध्यस्थता स्वैच्छिक होती है और इसमें समाधान की शर्तों पर अंतिम नियंत्रण विवाद में शामिल पक्षों के पास ही होता है, न कि किसी तीसरे पक्ष के पास, प्रकिया पक्षों के बीच संबंधों को खराब होने से बचाती है।संदीप कुमार शाही पी०एल०वी द्वारा बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की एआई सहायता प्राप्त कानूनी अनुवाद समिति द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को एआई के माध्यम से हिन्दी में अनुवादित किया गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों की अनुवादित प्रति माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की वेबसाइट https://www2.allahabadhighcourt.in/misc/suvas/index.html के माध्यम से डाउनलोड कर आदेश को सहज व सरल भाषा में पढ़ सकते हैं।पीयूष कुमार पी०एल०वी० द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया।