मेरा हमसफर: एक अहसास

मेरा हमसफर: एक अहसास

पत्नी के लिए सबसे अनमोल तोहफा, पति का दिया सम्मान है,

प्यार और इज़्ज़त मिल जाए, तो वही उसका सारा जहान है।

अगर मिल जाए ये खुशियाँ, तो सफर खूबसूरत बन जाता है,

वह हमसफर फिर ताउम्र, शिद्दत से साथ निभाता है।

जब शरीर बीमारी से टूटता है, तब बस तेरा ही सहारा चाहिए,

तेरी ममता भरी देख-रेख में, मुझे सुकून का किनारा चाहिए।

सच्चा हमसफर वही है, जो सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाए,

मेरी तकलीफ में जो खुद जागे, और मुझे चैन से सुलाए।

वो हमसफर श्रेष्ठ है, जो जरूरत पड़ने पर रसोई भी संभाल ले,

मेरी थकान को देख कर, जो घर की जिम्मेदारियां खुद पर डाल ले।

जब तुम बिजनेस के काम से, कहीं दूर चले जाते हो,

ये घर फिर घर नहीं लगता, तुम यादों में बहुत तड़पाते हो।

सूना-सूना लगता है आंगन, हर दीवार जैसे कुछ कहती है,

तेरे बिना मेरी हर सांस भी, जैसे अधूरी-अधूरी रहती है।

हर पल तेरी बातें, तेरी यादें, मेरे दिल को घेरे रहती हैं,

मिलन की वो बेताबी, आंखों से आंसू बनकर बहती है।

फिर जब वीडियो कॉल पर, तुम्हारा चेहरा सामने आता है,

दिल में जुगनू चमक उठते हैं, और मन सुकून पाता है।

. पाकर दीदार तुम्हारा, मेरा जीवन सार्थक हो जाता है,

तेरे साथ से ही ऐ हमसफर, ये रिश्ता मुकम्मल कहलाता है।

 

ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)