हनुमानगढ़ी बसंतिया पट्टी के महंत पर आरोप लगाने वाला निकला ‘किराएदार’, संत समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खोला मोर्चा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या धाम। हनुमानगढ़ी की प्रतिष्ठित बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास जी महाराज के विरुद्ध पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर किए जा रहे दावों को संत समाज ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पट्टी के वरिष्ठ सदस्यों ने स्पष्ट किया कि महंत जी पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार, झूठे और एक गहरे षड्यंत्र का हिस्सा हैं।
अवैध कब्जे की नीयत से रचा गया षड्यंत्र प्रेस वार्ता में बताया गया कि जो व्यक्ति स्वयं को बसंतिया पट्टी का सदस्य बता रहा है, वह वास्तव में वहाँ केवल एक किराएदार है। वह व्यक्ति परिसर में योग सिखाने और दवाइयाँ बेचने का काम करता था, जिसका ₹10,000 प्रति माह किराया तय था। पूज्य संत रामदास जी (संतोष दास जी) के ब्रह्मलीन होने के बाद, किराए की देनदारी से बचने और आश्रम की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने की नीयत से उसने खुद को मालिकाना हक वाला सदस्य बताना शुरू कर दिया है।
न सीधा खुला, न रजिस्टर में नाम
हनुमानगढ़ी की परंपराओं का हवाला देते हुए संतों ने बताया कि किसी भी सदस्य की प्रामाणिकता उसके ‘सीधे’ (भोजन अधिकार) और रजिस्टर में दर्ज नाम से होती है। आरोपित व्यक्ति के संदर्भ में तथ्य निम्नवत हैं। हनुमानगढ़ी के किसी भी आधिकारिक रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नहीं है। उसे कभी कोई ‘पुर्जपन’ (वैधानिक मान्यता) प्राप्त नहीं हुआ। वह कभी भी परंपरा के अनुसार किसी गुरु का अधिकृत शिष्य नहीं रहा है। उत्तराधिकार पर स्थिति स्पष्ट
बसंतिया पट्टी के सदस्यों ने पुरजोर तरीके से कहा कि स्वर्गीय संतोष दास जी के वास्तविक उत्तराधिकारी और शिष्य केवल अभिमन्यु दास और मनीराम दास ही हैं। इनके अलावा किसी तीसरे व्यक्ति का पट्टी की व्यवस्था या संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है। महंत जी को बदनाम करने के लिए कागजात जलाने का झूठा स्वांग रचा जा रहा है, जिससे हनुमानगढ़ी की गरिमा को ठेस पहुँच रही है।
प्रशासनिक जांच जारी संतों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विश्वास जताते हुए कहा कि क्षेत्राधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) मामले की गहन विवेचना कर रहे हैं। संतों का मानना है कि पुलिस जांच में बहुत जल्द ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा। चेतावनी दी गई है कि यदि आरोपित व्यक्ति ने अपनी अनर्गल बयानबाजी बंद नहीं की, तो उसे परिसर से बाहर कर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।