उत्तर प्रदेश में रबी सत्र 2025-26 के लिए किसान पाठशालाओं का आयोजन: कृषि मंत्री ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की अपील की

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री  सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से अपील की है कि वे रबी सत्र 2025-26 के लिए आयोजित की जाने वाली किसान पाठशालाओं में बढ़-चढ़कर भाग लें और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचार को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए कम लागत में अधिक लाभ अर्जित करें।कृषि विभाग द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/किसान पाठशालाओं का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम गत वर्ष 2024-25 की भांति योजनाओं के कन्वर्जन्स के माध्यम से संचालित होगा, जिसमें आर०के०वी०वाई० (द मिलियन फार्मर्स स्कूल), दलहन विकास की नवीन योजना तथा तिलहन विकास की राज्य पोषित योजना के प्रसार सम्बन्धी मदों का उपयोग किया जाएगा।कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार सबसे पहले मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 08 दिसंबर, 2025 को सुबह 10ः30 बजे से दोपहर 1ः30 बजे तक आयोजित होगा। इसके बाद जनपद स्तरीय ट्रेनर्स प्रशिक्षण 09 और 10 दिसंबर, 2025 को होगा, जबकि ट्रेनर्स मूल्यांकन कार्यक्रम 11 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुबह 11ः00 बजे से दोपहर 2ः00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर दो दिवसीय गोष्ठियों/पाठशालाओं का शुभारम्भ 12 दिसंबर, 2025 को होगा और यह आयोजन 12 दिसंबर से 29 दिसंबर, 2025 तक अपराह्न 2ः00 बजे से सायं 5ः00 बजे तक चलेगा।आयोजन के लिए प्राथमिकता के आधार पर पैक्स सोसायटी, किसान कल्याण केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र एवं प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर की गोष्ठी/किसान पाठशाला में 80 से 100 कृषकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।कार्यक्रम के अन्य महत्वपूर्ण निर्देशों में रबी-2025-26 की कार्य योजना को दिए गए भौतिक लक्ष्यों के अनुसार तैयार कर मुख्यालय को 08 दिसंबर तक उपलब्ध कराना, प्रत्येक विकास खंड में सर्वाधिक क्षेत्राच्छादन वाली चार प्रमुख फसलों का चयन, पिछले तीन वर्षों की सर्वाधिक उत्पादकता प्राप्त करने वाले 5 प्रगतिशील कृषकों/कृषि सखियों का चयन और उनके द्वारा गोष्ठी/पाठशाला में पहले आधा घंटे का उद्बोधन कराया जाना शामिल है।साथ ही, गोष्ठियों/पाठशालाओं में जन-प्रतिनिधियों और एफपीओ के सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा उपलब्धतानुसार एफपीओ के अध्यक्ष/सदस्यों से वार्ता कराना अनिवार्य है। आयोजन में स्थानीय परिस्थितियों और एग्रीक्लाइमेटिक ज़ोन के अनुसार प्रमुख फसलों और विषयों के बारे में कृषकों को जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा, दलहन, तिलहन, जायद, मक्का, उर्द, बाजरा, मूंग की खेती आदि विषयों को सम्मिलित किया जाएगा।कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और पुरस्कार हेतु अनुमन्य धनराशि 500 रुपए प्रति गोष्ठी/पाठशाला से जैव कीटनाशी, कवकनाशी और शाकभाजी के बीजों के रूप में दिया जाएगा। गोष्ठी आयोजन के उपरांत फोटोग्राफ, कृषकों की उपस्थिति और उद्बोधन देने वाले कृषकों का विवरण विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है, ताकि वास्तविक आयोजन की समीक्षा की जा सके। कार्यक्रम के समापन के बाद प्रतिभागियों की जानकारी संलग्न प्रारूप में विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।यह पहल किसानों को नई तकनीक और नवाचार से जोड़ते हुए कृषि क्षेत्र में क्षमता निर्माण और कम लागत में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने का अवसर प्रदान करेगी।