मां सरयू को अर्पित की गई चुनरी, भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव पर संतों और भक्तों ने सरयू तट पर किया दूध अभिषेक

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। बड़े भक्तमाल मंदिर के संस्थापक महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव के पावन अवसर पर रविवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। इस अवसर पर मां सरयू को चुनरी अर्पित करने हेतु एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें अयोध्या नगरी भक्तिमय हो उठी।
शोभायात्रा का शुभारंभ बड़े भक्तमाल मंदिर से महंत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्य और महंत अवधेश कुमार दास महाराज के संयोजन में हुआ। हनुमानगढ़ी के शाही निशान, बैंड-बाजों और दर्जनों सजे-धजे रथों के साथ शोभायात्रा हनुमानगढ़ी, श्रृंगारहाट और लता मंगेशकर चौक होते हुए मां सरयू के तट पर पहुंची।सरयू तट पर शाही निशान का पूजन करने के बाद मां सरयू का सवा कुंटल दूध से अभिषेक किया गया। संत-महंतों ने फल-फूल अर्पित कर आरती उतारी और मां सरयू को चुनरी अर्पित की। इस दौरान हनुमानगढ़ी के नागा संतों ने अपने अद्भुत करतबों से भक्तों का मन मोह लिया। महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने कहा कि महंत रामशरण दास जी के आशीर्वाद से आश्रम में निरंतर सेवा कार्य चल रहे हैं। प्रतिवर्ष चुनरी अर्पण और भंडारा आयोजित किया जाता है, परंतु इस वर्ष 50वें साकेतोत्सव के कारण आयोजन विशेष रहा। उन्होंने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा के दौरान भगवान राम की सेवा करने वाले भक्तों को प्रतिदिन सम्मानित किया जा रहा है। जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि बड़े भक्तमाल महाराज केवल संत नहीं, बल्कि भजन और सेवा के प्रतीक थे। उनके साकेतोत्सव के अवसर पर अयोध्यावासी सेवा कर रहे हैं, यह गर्व का विषय है।महंत संजय दास ने कहा कि यह आयोजन अयोध्या को आनंदमय बना रहा है, जबकि स्वामी अनंताचार्य महाराज ने महंत अवधेश दास की सेवा भावना को अयोध्या की सच्ची पहचान बताया।चुनरी महोत्सव में महंत बिंदुगद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य, महंत जन्मेजय शरण, महंत वैदेही वल्लभ शरण, महंत जनार्दन दास, महंत मनीष दास, महंत हेमंत दास सहित सैकड़ों संत-महंत एवं भक्तगण उपस्थित रहे।मां सरयू के जयकारों से गूंजती अयोध्या में श्रद्धा का अभूतपूर्व वातावरण देखने को मिला।