जरवल कस्बा स्थित शहनाई मैरेज हॉल में सामाजिक सद्भावना मंच के तत्वावधान में सीरत-ए-नबी स.अ.व. कार्यक्रम के अंतर्गत “मोहम्मद साहब सभी के लिए रहमत” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि एडवोकेट जनाब अकरम खान (झांसी) तथा विशेष अतिथि श्री उमाशंकर बौद्ध रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक मोमिन हाशमी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज अबरार साहब की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। प्रथम वक्ता शिक्षक अलीम अहमद ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, कन्या हत्या और मानवाधिकार हनन जैसी कुरीतियों को समाप्त कर एकेश्वरवाद व मानवता की स्थापना की। नीलेंद्र सिंह राणा ने कुरआन को जीवन का मार्गदर्शक बताया। शिक्षक रवींद्र कुमार वर्मा ने कहा कि पैगंबर साहब का जीवन शांति और भाईचारे के लिए समर्पित रहा, वहीं मौलाना हसीबुल्लाह ने उनके जीवन को अनुकरणीय बताया।
विशेष अतिथि श्री उमाशंकर बौद्ध ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब और महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं सामाजिक भेदभाव मिटाकर शांति व समरसता स्थापित करने की प्रेरणा देती हैं। मुख्य अतिथि जनाब अकरम खान ने कहा कि पैगंबर साहब ने एकेश्वरवाद, मानव एकता, महिला अधिकार, गुलामों की मुक्ति और शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके शासनकाल में केवल रक्षात्मक युद्ध हुए और इस्लाम का संदेश प्रेम व शांति से फैला, यही कारण है कि आज उनके करोड़ों अनुयायी हैं।
डॉ. अलाउद्दीन (बाराबंकी) और शादाब साहब (कानपुर) ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आए अतिथियों को पैगंबर ﷺ की जीवनी भेंट की गई।
इस अवसर पर रज्जब अली, सलमान, दारा सिंह, कृष्ण मुरारी, विजय, मौलाना कलीम, हाफिज नसरुल्ला, मास्टर रिजवान, नीलेंद्र सिंह, कृष्णपाल, आजाद हाशमी, विनय श्रीवास्तव, वीरेन्द्र सरवरिया, शकील, साहिल हाशमी, अकरम सईद, कमाल भाई, अजीम उद्दीन और नज्मुज्जमान नज्म सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।