उन्मुक्त उड़ान मंच पर बदलते समय में अभिभावकों के कर्तव्य और पीढ़ी के अंतर को पाटने की ओर सार्थक कदम

उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा आयोजित साप्ताहिक लेखन क्रम में इस बार का विचारोत्तेजक और समसामयिक विषय था – “बदलते समय में अभिभावकों के कर्तव्य और पीढ़ी के अंतर को पाटने की ओर सार्थक कदम!”

रचनाकारों ने अपने आलेखों में संवेदनशील दृष्टिकोण, समाजोपयोगी सुझाव और यथार्थ के धरातल से जुड़े विचार प्रस्तुत किए। इस सृजनात्मक आयोजन में विभिन्न रचनाकारों ने लेख, संस्मरण, लघु निबंध आदि के माध्यम से समसामयिक परिवेश में अभिभावकों की भूमिका, बदलती जीवनशैली, डिजिटल युग में संबंधों की चुनौतियाँ और पारिवारिक संवाद की आवश्यकता जैसे विषयों को संवेदनशीलता और गंभीरता से प्रस्तुत किया।

रचनाकारों ने अपने आलेखों में यह स्पष्ट किया कि—

आज के समय में केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की पूर्ति पर्याप्त नहीं, संवेदनशील संवाद, सहभागिता और समय देना ज़रूरी है। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने जहाँ सूचना को सुलभ किया है, वहीं पारिवारिक निकटता और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव भी डाला है। पीढ़ियों के बीच बढ़ती खाई को पाटने के लिए जरूरी है कि अभिभावक खुद को अद्यतन करें, समसामयिक ज्ञान से जुड़ें और एक मित्रवत संवाद शैली अपनाएँ।

इस अवसर पर मंच की संरक्षिका डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने कहा, “समय का परिवर्तन परिवारों को नई दिशा में सोचने को विवश कर रहा है। अभिभावक यदि नई पीढ़ी की भाषा, जरूरत और संघर्ष को समझें, तो यह दूरी पुल में बदल सकती है।”

आयोजन प्रभारी डॉ. अनीता राजपाल अनु वसुंधरा ने कहा, “हमारे लेखन का उद्देश्य मात्र अभिव्यक्ति नहीं, सामाजिक विमर्श और बदलाव की प्रेरणा देना भी है। यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।”

मंच के सभी प्रतिभागियों ने उत्तरदायित्वपूर्ण अभिभावकत्व, समझ और संवाद की आवश्यकता, तथा साझा मूल्यों पर आधारित परिवारिक संस्कृति को रेखांकित किया। निशा कौल शर्मा, सुरेश सरदाना, अंजना व्यास, परमा दत्त झा, स्वर्णलता सोन कोकिला, संजीव कुमार भटनागर सजग, डॉ वंदना खंडुरी, सुनील कुमार खुराना, अशोक दोशी दिवाकर, रवि कुमार झा, वीना टंडन पुष्करा, सुरेश चंद्र जोशी सहयोगी, दिव्या भट्ट स्वयं, डॉ अनीता राजपाल अनु वसुंधरा, नीरजा शर्मा अवनि, आदि के लेखों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि पीढ़ियों के बीच की दूरी को केवल उपदेशों से नहीं, संवाद, समझ, और साझेदारी के भाव से ही कम किया जा सकता है।

इस सत्र में प्रकाशित रचनाओं में समाजशास्त्रीय सोच, अनुभवों की झलक और यथार्थ की गूंज थी।

मंच की संरक्षिका डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने सभी रचनाकारों की सक्रिय भागीदारी के लिए सराहना व्यक्त की और कहा – “लेखन केवल शब्दों का प्रवाह नहीं, समाज को दिशा देने का एक सशक्त माध्यम है – और इस बार यह उद्देश्य पूर्णत: सफल रहा।”

सप्ताह के अन्य लेखन में उल्लेखनीय रहा राष्ट्रीय ध्वज दिवस पर रूप घनाक्षरी में गीतात्मक प्रस्तुति, सुमधुर भाव और ओजस्वी लय के साथ रचनाकारों ने तिरंगे और माँ भारती को अपने श्रद्धा सुमन अर्पण किए|

मंच संस्थापिका डॉ दवीना अमर ठकराल” देविका” ने सभी की विधानुसार प्रेषित रचनाएँ गा कर समीक्षात्मक अभिव्यक्ति दी। 23 जुलाई को स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़े डॉ अमर बलिदानी का जन्मदिवस था | इस दिवस को एक पुण्य पर्व के रूप में मान्य गया और रचनाकारों ने शहीद चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के जीवन के प्रसंगों को उद्धृत कर उनका नमन वंदन किया| स्वैच्छिक विषय और विधा में लेखन में 50 रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर अपने भाव लिखे| कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागी रचनाकारों को विशेष सम्मान-पत्र प्रदान किए गए, जिन्हें नीरजा शर्मा ‘अवनि’ और नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’ द्वारा संयोजित और डिज़ाइन किया गया था। सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’ और अशोक दोशी ‘दिवाकर’ द्वारा की गई आयोजन की गहन समीक्षा तथा कृष्णकांत मिश्र ‘कमल’ और संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’ द्वारा विज्ञप्ति हेतु रचनाओं का संकलन एवं विश्लेषण—इन सभी प्रयासों ने कार्यक्रम की सफलता को एक नया आयाम दिया और नए मापदंड स्थापित किए।

उन्मुक्त उड़ान मंच निरंतर इसी प्रकार साहित्यिक-सामाजिक संवाद की राह प्रशस्त करता रहेगा।