कुदरहा, बस्ती। कुदरहा ब्लाक के छरदही गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन व्यास पीठ से आचार्य पंडित घनश्याम किशोर मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के बाललीला, माखन चोरी और गोवर्धधन पर्वत व पूतना बध की लीला का वर्णन किया। कथा को विस्तार देते हुए बाललीला, माखनचोर प्रसंग को बताते हुए कहा कि देवराज इंद्र का मान मर्दन करने के लिए भगवान श्री कृष्णा ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर मूसलाधार वर्षा से अपने भक्तों का रक्षा किए। पूतना बध का वर्णन करते हुए बताया कि पूतना कोई साधारण स्त्री नहीं थी। वह राजा बलि की बेटी राज कन्या थी। भगवान वामन आए और उनका सौंदर्य देख राज कन्या सोची कि मुझे भी ऐसा ही बेटा मिले जिसे गले लगाकर अपना स्तान पान कराऊं। लेकिन वामन विराट हो गए तो राजा बलि का सर्वस्व छीन लिए तो वह क्रोधित हो उठी और वह जहर पिलाने का निर्णय ली। वही कालांतर में पूतना बनी। वह कांहा को दूध के साथ जहर पिला कर राजा कंश के कहने पर मारना चाहती थी। भगवान समझ गए और स्तनपान के साथ प्राण भी पी लिए। इसके बाद वह असली रूप धारण की और भगवान के चरणों में जा गिरी। इस प्रकार पूतना का बध हुआ।
मुख्य यजमान राजेंद्र प्रसाद दुबे, आचार्य आनंद मिश्रा, पं मुरलीधर दुबे, नरेंद्र प्रसाद दुबे, राजू दुबे, गुड्डू, धर्मेद्र दुबे, शिखर, विनय, अतुल दुबे, अजय कुमार, राम प्रकट उपाध्याय, सुशील दुवे, पप्पू, पंडित हरिराम, संतोष दुबे, सूरज, राम भरत दुबे, मनोज, दिलीप कुमार, विजली गोस्वामी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।