ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में नैक मूल्यांकन शुरू, टीम ने किया व्यापक निरीक्षण

लखनऊ  ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा विश्वविद्यालय के मूल्यांकन की प्रक्रिया सोमवार से आरंभ हो गई। यह प्रक्रिया हाईब्रिड मोड में संचालित हो रही है, जिसमें दो सदस्य भौतिक रूप से परिसर में मौजूद हैं, जबकि शेष पांच सदस्य ऑनलाइन मोड से निरीक्षण में भाग ले रहे हैं। नैक टीम 2 से 4 जून 2025 तक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक और भौतिक संरचनाओं का सूक्ष्म अवलोकन करेगी।उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण में नैक टीम का स्वागत किया गया। इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और नवाचारों का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि शोध गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नियोजित रणनीतियों पर काम किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों को एक दर्जन से अधिक शोध परियोजनाएं प्राप्त हुई हैं।
आईक्यूएसी समन्वयक द्वारा प्रस्तुत पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन के आधार पर नैक टीम ने गुणात्मक समीक्षा की और विभागीय प्रस्तुतिकरणों का क्रमशः अवलोकन किया। निरीक्षण में अंग्रेजी एवं मॉडर्न यूरोपियन-एशियन लैंग्वेज, कॉमर्स, पत्रकारिता एवं जनसंचार, गृह विज्ञान, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग, विधि और फार्मेसी विभाग प्रमुख रूप से शामिल रहे।टीम ने पाठ्यक्रमों में ब्लूम्स टैक्सोनॉमी की उपलब्धता, विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन लर्निंग की सुविधा, स्टूडेंट्स सेंट्रिक टीचिंग मेथड्स आदि विषयों पर गहन पड़ताल की। निरीक्षण के उपरांत लंच ब्रेक के बाद टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित विभिन्न विभागों का भौतिक दौरा किया।इस दौरान टीम ने अंग्रेजी, पत्रकारिता, गृह विज्ञान, दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंजीनियरिंग, कॉमर्स, सोलर पैनल, शिक्षा, इतिहास, अरबी, पर्शियन, उर्दू और व्यवसाय प्रशासन जैसे विभागों में चल रही अकादमिक गतिविधियों, शोध कार्यों, विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं और नवाचारों की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान टीम ने विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से पाठ्यक्रम, शोध, नवाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अनेक प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर संबंधित विभागों द्वारा दिए गए।निरीक्षण के समापन चरण में नैक टीम ने सभी संकायाध्यक्षों और विभागाध्यक्षों के साथ एक संयुक्त संवाद सत्र भी आयोजित किया, जिसमें पाठ्यक्रम संरचना, शोध गुणवत्ता, शिक्षण पद्धतियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई।यह निरीक्षण न केवल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन है, बल्कि इसे एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भाषा विश्वविद्यालय भविष्य में और अधिक अकादमिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हो सकेगा।