*हमारा कल मिलेगा तुलसी के मानस में – श्री रामायण धर द्विवेदी*


*भारतीय ज्ञान परंपरा में राम चरित मानस की महत्वपूर्ण भूमिका. गोपेश्वर त्रिपाठी*

बस्ती,महिला महाविद्यालय, बस्ती में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदानित कल्चरल क्लब ‘स्पृहा’; यू.जी.सी. एम.एम.टी.डी.सी. एच.आर.डी.सी.जोधपुर, राजस्थान तथा प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, महिला महाविद्यालय बस्ती के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा: रामायण और रामचरितमानस के विशेष संदर्भ में” में दिनांक 07 मई 2025 को संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। इस संगोष्ठी की संयोजक डॉ. रुचि श्रीवास्तव, आयोजन सचिव प्रो. सुनीता तिवारी (प्राचार्या) एवं संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. नूतन यादव व डॉ. सुधा त्रिपाठी है।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि रामायण धर द्विवेदी (कवि एवं साहित्यकार), मुख्य वक्ता डॉ. डी.पी. शर्मा (हड़प्पा संग्रह राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के पूर्व प्रमुख), प्रतिष्ठित वक्ता श्री गोपेश्वर त्रिपाठी (कवि एवं साहित्यकार), विशिष्ट अतिथि प्रो.‌ अभय प्रताप सिंह (प्राचार्य, ए.पी.एन. पी.जी. कालेज, बस्ती), विशिष्ट अतिथि प्रो. रीना पाठक (प्राचार्या, पं. शिवहर्ष किसान पी.जी. कॉलेज, बस्ती) एवं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, प्रतिष्ठित वक्ता एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत सम्मान स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि महाविद्यालय में निरन्तर हो रहे कार्यक्रमों से महाविद्यालय परिवार का मनोबल बढ़ता है। कार्यक्रम की श्रृंखला में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी, मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, प्रतिष्ठित वक्ता एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा अभिलेख सार संग्रह का विमोचन किया गया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. डी.पी. शर्मा ने रामवनगमन मार्ग का पुरातात्विक विश्लेषण करते हुए बी.बी. लाल के श्रृंगवेरपुर, हस्तिनापुर (मेरठ) एवं बिठूर (कानपुर) के अध्ययन को प्रस्तुत किया । विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात समाज सेवी एवं मानस मर्मज्ञ गोपेश्वर त्रिपाठी ने राम-लक्ष्मण प्रसंग (लंका विजय के पश्चात्) के माध्यम से राम के व्यक्तित्व के राष्ट्र पक्ष को प्रस्तुत किया। गोपेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में राम चरित मानस की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विशिष्ट अतिथि प्रो. रीना पाठक ने सनातन धर्म के ऐतिहासिक परिदृश्य में तुलसीदास की भूमिका को प्रस्तुत करते हुए, रामचरितमानस में समाहित पुरुषार्थ का विशद् विवेचन किया। मुख्य अतिथि श्री रामायण धर द्विवेदी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में रामायण और रामचरितमानस के महत्व को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीवन प्रबन्धन का ग्रंथ है ‘रामायण और रामचरितमानस’, यह ऊर्जा का केंद्र है। उद्घाटन सत्र के अंत में आभार ज्ञापन प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पाण्डेय ने दिया। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन डॉ. रुचि श्रीवास्तव एवं मंच का संचालन डॉ. नूतन यादव ने किया।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण के प्रथम तकनीकी सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मनोज मिश्रा (सहायक आचार्य, प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, संत कबीरनगर) ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में रामायण और रामचरितमानस को ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए, कालक्रम कि मत भिन्नता पल प्रकाश डाला। साथ ही प्रथम तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. ऋषिकेश बहादुर (सहायक आचार्य, पटना ट्रेनिंग कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय) ने विश्व कल्याण और आत्म विकास के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता को प्रस्तुत किया।
द्वितीय सत्र में सर्व प्रथम पुरातन छात्रा समागम आयोजित किया गया जिसमें प्रमुख रूप से डॉ कंचन त्रिपाठी, समाज सेविका प्रीति श्रीवास्तव,डॉ सौम्य पाल, डॉ संध्या राय , मानवी सिंह, डॉ पूजा गुप्ता,प्रियंका यादव,ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा किया,
पुरातन छात्रा समागम कार्यक्रम की संयोजक और कार्यक्रम का संचालन डॉ वीना सिंह ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेश तिवारी (सहायक आचार्य, प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, पं. महादेव शुक्ल कृषक स्नातकोत्तर कॉलेज, गौर, बस्ती) ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में रामायण और रामचरितमानस के संदर्भ में जनसहभागिता की प्रासंगिकता को प्रस्तुत किया, साथ ही संस्कृत भाषा की विलुप्तता को जनसहभागिता में कमी का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस के दो तकनीकी सत्रों में ऑनलाइन और ऑफलाइन कुल 60 शोध पत्र पढ़े गए।
डॉ. सीमा सिंह, डॉ रघुनाथ चौधरी, डा रोहित सिंह,सूर्य कांत ओझा प्रधानाचार्य,सिंटू ओझा, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. सुहासिनी सिंह, डॉ. सन्तोष यदुवंशी, श्रीमती नेहा परवीन, डॉ. प्रियंका पांडेय, डॉ. कमलेश पांडेय नेहा श्रीवास्तव, मोनी पांडेय, दुर्गेश गुप्ता, श्री गिरिजानंद राव, अरुणमणि त्रिपाठी, सूर्या उपाध्याय, श्रीमती पूनम यादव, श्री अनुराग शुक्ला सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक, शोध छात्र, पुरातन छात्राएं एवं महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रही।