संगीत साहित्य मंच की 116वीं काव्यगोष्ठी संपन्न, कवियों ने झूमकर बरसाया साहित्य रस,,,,
अनुराग लक्ष्य, 16 फरवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
मासिक काव्य गोष्ठियों की श्रृंखला में संगीत साहित्य मंच ठाणे द्वारा निरंतर की जाने वाली 116 वीं मासिक काव्यगोष्ठी इस महीने दिनाँक 15/02/25 शनिवार को संस्था के संयोजक , आदरणीय श्री रामजीत गुप्ता जी के आवास पर मुख्य अतिथि श्री लाल बहादुर यादव “कमल”जी की उपस्थिति तथा श्री श्रीधर मिश्र “आत्मिक “जी की अध्यक्षता और श्री उमेश मिश्र प्रभाकर जी के संचालन मे सम्पन्न हुई !
कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री सदाशिव चतुर्वेदी “मधुर”जी द्वारा माँ सरस्वती के चरणों मे वंदना स्वरुप प्रथम पुष्प अर्पित करके किया गया!तत्पश्चात नावाँकुर कवि श्री राकेश त्रिपाठी जी द्वारा बेरोजगारी पर मौलिक रचना का मधुर कंठ से गायन किया गया!इसके बाद श्री अरुण मिश्र अनुरागी जी द्वारा होली पर श्रृंगार गीत का सुन्दर गायन किया गया! कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए डॉ शरदचंद्र जी ने पुलवामा आतंकी हमले पर वीर रस की कविता प्रस्तुत किया!अगली कड़ी में वरिष्ठ कवि श्री सुशील शुक्ला नाचीज़ जी द्वारा शेरो शायरी एवं ग़ज़ल का सुन्दर प्रस्तुतीकरण किया गया!तदनंतर ओज के कवि श्री राजेश दूबे अल्हड़ असरदार जी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर कविता सुना कर सबको रोमांचित कर दिया !तत्पश्चात मधुर जी ने कुम्भमेला 2025 पर “भइया हम कुम्भ नहाइ लीन” अवधी गीत प्रस्तुत किया!गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुये वरिष्ठ कवि श्री ओम प्रकाश सिंह जी ने अध्यात्म पर सराहनीय गीत प्रस्तुत किया ! कार्यक्रम में कुछ देर से शिरकत किये श्री रामप्यारे रघुवंशी जी ने गाँव और शहर के बीच सामन्जस्य के भाव की सराहनीय कविता प्रस्तुत किया!संस्था के संयोजक श्री राम जीत गुप्ता जी ने एक होली गीत “रंगों की फुहार” का सुन्दर गायन किया!इसके बाद प्रसिद्ध गज़लकार श्री एन. बी. सिंह नादान जी ने बेहतरीन अंदाज़ में ग़ज़ल का गायन किया!कार्यक्रम के संचालक श्री उमेश मिश्र जी ने अपनी कविता के माध्यम से पुलवामा हमले पर जाँबाज वीरों के समर्पित भाव एवं दिल के दर्द का शानदार चित्रण किया!इसकेबाद मुख्यअतिथि श्री लालबहादुर यादव जी ने होली पर समसामइक रचना विरह गीत का सराहनीय गायन किया!कार्यक्रम के अन्तिम चरण में गोष्ठी के अध्यक्ष श्री श्रीधर मिश्र “आत्मिक” जी ने अपनीआध्यात्मिक कविता के माध्यम से सभी का मन मोह लिया तथा गोष्ठी की खूबसूरती को सराहते हुये सभी सहभागियों के विषय में छन्दबद्ध पंक्तियों द्वारा काव्य विवेचना किया!यह विशेषता बहुत ही कम कवियों में देखने को मिलती है कि किसी भी विषय पर त्वरित पंक्तियाँ लिख सके!सच कहूँ तो यह मेरा अपना प्रथम अनुभव रहा!
आज की गोष्ठी विशेष रूप से राष्ट्रभक्ति,आध्यात्मिक, सामाजिक तथा श्रृंगार प्रधान कविताओं एवं चर्चाओं का विषय रही!
कार्यक्रम के अंत मे सहसंयोजक मधुर जी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया और सबका आभार व्यक्त करके कार्यक्रम का समापन किया!
कार्यक्रम 5.30 बजे से रात्रि 8.00 बजे तक हँसी ख़ुशी और ठहाकों के बीच सम्पन्न हुआ! सभी प्रतिभागियों ने जमकर गोष्ठी का आनन्द उठाया!काव्यगोष्ठी के अन्तिम पड़ाव पर स्वादिष्ट अल्पाहार, फलाहार और चाय की चुस्कियों का सभी ने लुत्फ़ उठाया !