उन्मुक्त उड़ान मंच की संस्थापिका डॉ दवीना अमर ठकराल के मार्गदर्शन में उन्मुक्त उड़ान मंच पर एक और साप्ताहिक आयोजन सफल हुआ

आयोजन प्रभारी सुनील भारती आज़ाद सौरभ ने विषय को सार्थकता प्रदान करते हुए बेहतरीन विषय निरूपण कर आयोजन का शुभारंभ किया व बख़ूबी कर्तव्य निर्वहन किया। “युवा मन अथाह भंडार है ऊर्जा का, होना चाहिए सदुपयोग युवा शक्ति का” विषय वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है। इस विषय पर साप्ताहिक आयोजन में मंच की संस्थापिका डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ सहित डॉ अनीता राजपाल, अशोक दोशी, अनु तोमर, कुसुम लता, संजीव भटनागर, मनजीभाई मनरव, फूलचंद्र विश्वकर्मा, स्वर्णलता सोन, मीनाक्षी सुकुमारन, मंजुला सिन्हा, दिव्या भट्ट, वीना टंडन कुल 13 रचनाकारों ने प्रतिभाग कर अपनी लेखनी के माध्यम से युवाओं के भीतर की ऊर्जा का सदुपयोग कैसे हो, उस से मिलने वाले उचित परिणाम और अपने मार्ग से भटक चुके युवाओं का सही मार्गदर्शन आदि सुन्दर विचार अपने लेख के माध्यम से समस्त पाठकों के बीच रखे | सभी कलमकारों के विचार थे कि युवा किसी भी राष्ट्र की आधारशिला होते हैं। उनकी ऊर्जा और उत्साह देश की उन्नति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह विषय विचारणीय है कि युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग कैसे किया जाए?क्योंकि इसका दुरुपयोग न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन बल्कि पूरे समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। युवा मन उत्साह, साहस और कल्पनाशीलता का स्रोत है। युवाओं में अनंत संभावनाएँ और ऊर्जा होती हैं, जो उन्हें बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल करने में सक्षम बनाती हैं। उनका आत्मविश्वास और जिज्ञासा उन्हें नए आविष्कार और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है |साथ ही उनका मानना था कि युवा शक्ति के सदुपयोग के लिए आवश्यक है कि उनकी ऊर्जा को सही दिशा में प्रवाहित किया जाए। शिक्षा, रोजगार, समाजसेवा, और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से उनकी क्षमताओं का विकास किया जा सकता है। खेल, विज्ञान, कला और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं के योगदान को बढ़ावा देना समाज और राष्ट्र के लिए लाभदायक हो सकता है। यदि युवा शक्ति का दुरुपयोग हो तो यह समाज के लिए घातक हो सकता है। नशे, हिंसा और गैरकानूनी गतिविधियों में फंसकर युवा न केवल अपनी ऊर्जा को व्यर्थ करते हैं, बल्कि समाज को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए युवाओं को नैतिक शिक्षा और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना अनिवार्य है।प्रेरणादायक दृष्टिकोण के अंतर्गत इतिहास और साहित्य में ऐसे कई उदाहरण हैं जो युवा शक्ति के सदुपयोग की प्रेरणा देते हैं। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वासी और कर्तव्यपरायण बनने का संदेश दिया। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने विचारों और कर्मों से यह दिखाया कि युवा अपनी ऊर्जा का प्रयोग वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति में कर सकते हैं।निष्कर्ष यह है कि युवा मन एक अथाह ऊर्जा का भंडार है जिसका सही उपयोग न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी सहायक है। इसके लिए आवश्यक है कि युवाओं को शिक्षा, प्रेरणा और अवसर प्रदान किए जाएं। सही दिशा में प्रवाहित युवा शक्ति समाज में क्रांति ला सकती है और एक आदर्श भविष्य की नींव रख सकती है। उन्मुक्त उड़ान मंच के कलमकारों ने मिलकर साप्ताहिक आयोजन को सफल बनाया।कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने कहा युवा काल की ऊर्जा को सही दिशा देने की ज़िम्मेवारी परिवार, समाज व देश की भी है। यह एक सम सामायिक, चिंतनीय, विचारणीय व मनन करने योग्य विषय है। हम सब को भी मिलकर अपने चारों तरफ़ इस तरह की ऊर्जा का उपयोग परिवार, समाज व देश के लिए करवाने के लिए युवा पीढ़ी को तैयार करने का भरपूर प्रयास करना चाहिए।