पद्म भूषण डॉ. गोपाल दास नीरज की 100वीं जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, जो उत्तर प्रदेश शासन के नियंत्रण में कार्य करता है, ने आज 04 जनवरी 2025 को पद्म भूषण डॉ. गोपाल दास नीरज की 100वीं जयंती के अवसर पर एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नेशनल पी.जी. कॉलेज के प्रांगण में आयोजित हुआ, जिसमें नीरज जी के साहित्यिक अवदान पर चर्चा की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री विद्या बिंदु जी ने की, जिन्होंने नीरज जी के जीवन और रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि नीरज जी का व्यक्तित्व प्रेरक था और उनका गीत “एक स्वप्न के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है” आज भी लोगों को प्रेरित करता है। विद्या बिंदु जी ने कहा कि नीरज जी ने आने वाली पीढ़ी को अपनी गीतों की अमूल्य विरासत छोड़ी।मुख्य वक्ता प्रो. हरि शंकर मिश्र ने नीरज जी के संघर्षपूर्ण जीवन को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नीरज जी की काव्य प्रतिभा बचपन से ही विकसित हुई थी और उनका पहला गीत संग्रह 9वीं कक्षा में ही तैयार हो गया था।मुख्य अतिथि प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने नीरज जी के कृतित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नीरज जी जीवन के कवि थे। उन्होंने मंचीय कविता को शिखर पर पहुँचाया और प्रेम, सौंदर्य, और छांदस कविता को जीवित रखा। वे काव्य शास्त्र, ज्योतिष और आयुर्वेद के भी अच्छे जानकार थे।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रश्मि शील ने किया। इस अवसर पर डॉ. सीमा सिंह, प्रो. रामकृष्ण और प्राचार्य देवेंद्र कुमार जी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में कॉलेज के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही और उन्हें शाल व माला द्वारा सम्मानित किया गया।संस्थान के निदेशक विनय श्रीवास्तव के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की उपस्थित जन ने भूरी-भूरी सराहना की। कार्यक्रम में लखनऊ के कई साहित्यकारों और कॉलेज के विद्यार्थियों और अध्यापकों की उपस्थिति रही।आगे आने वाले दिनों में नीरज जी की स्मृति में भाषा संस्थान द्वारा एक बृहद कवि सम्मेलन और युवा प्रतिभा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें काव्य, कहानी और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।