*शरीर में हैअसली अयोध्या* आचार्य सुरेश जोशी

🕉️ ओ३म् 🕉️
*शरीर में हैअसली अयोध्या*
आर्य समाज मंदिर सैजपुर में 📚 अथर्वेद की कथा का शुभारंभ📚 हो चुका है। इस अवसर पर *श्रीमती दीपा एवं श्रीमान वेद प्रकाश डलवाणी* यजमान पद पर शुशोभित रहे। वेद कथा के प्रथम दिवस पर बताया गया कि वास्तविक अयोध्या मानव शरीर के ही भीतर हैं जहां पर *आत्मा व परमात्मा* दोनों व्याप्य व्यापक भाव से रहते हैं।इस बात की पुष्टि हेतु निम्न वेद मंत्र का संदर्भ दिया!
*अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या । तस्यां हिरण्यय: कोश: स्वर्गो ज्योतिषावृत:।।*
अथर्वेद १०/२/३१
⛰️ *मंत्र का पदार्थ* ⛰️
*अष्टचक्रा*= यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान व समाधि इध आठों का क्रम रखने वाली ! *नवद्वारा* = सात मस्तक के छिद्र+एक मन+एक बुद्धि रुपी नौ द्वार वाली । *पू*= पूर्ति वा पुरी देह । *देवानाम्*= देवों की उन्मत्तों के लिए *अयोध्या*= अजेय अर्थात् कभी न पराजित होने वाली है। *तस्याम्*= उस पुरी में *हिरण्यय:*= अनेक बलों से युक्त *कोश:*= कोश भण्डार अर्थात् चेतन जीवात्मा *स्वर्ग:*= सुख स्वरूप परमात्मा की ओर चलने वाला *ज्योतिषा*= ज्योति प्रकाश स्वरुप ब्रह्म से *आवृता:*= छाया हुआ है।
*वेद मंत्र के अर्थ का अनर्थ*
ईश्वर को जबरदस्ती अवतार वाला सिद्ध करने वाले *पोराणिक हिंदू धर्म गुरुओं* ने इस मंत्र का अनर्थ इस प्रकार किया………..
*एक अयोध्या नाम की नगरी है।उसमें चारों ओर द्वार और चक्र हैं उसी अवध पुरी में भगवान राम विराजमान रहते हैं।*
सत्यता यह है कि *रमंते योगिनां हृदये स राम:* अर्थात् जो परमात्मा इस आठ क्रम अर्थात् *यम,नियम,आसन,प्राणायाम्,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान व समाधि व नव द्वारों वाली देवपुरी के अजेय स्थान हृदयाकाश में जीवात्मा के साथ रमण कर रहा है उसी का एक गुणवाची नाम राम भी है*।
इस प्रकार शरीर रुपी अयोध्या में व्याप्य -व्यापक भाव से रहने वाले परमात्मा को को प्राप्त करने का एक ही उपाय है। *अष्टांग योग*।
*हर जगह मौजूद है पर नजर आता नहीं।* *योग साधन के बिना कोई उसे पाता नहीं*।।
इस प्रकार आज के अन्य *वैदिक सत्स़ग* आर्य समाज सैजपुर,आर्य समाज थलतेज व आर्य समाज काकरिया में सम्पन्न हुए।
आचार्य सुरेश जोशी
एवं
प़डिता रुक्मिणी शास्त्री बाराबंकी।
*प्रवासीय कार्यालय*
आर्य समाज मंदिर
सैजपुर बोघा अहमदाबाद गुजरात।
*समय रात्रि 8.30*