अवध वाटिका साहित्य मंच बहराइच के तत्वावधान में पाक्षिक कवि गोष्ठी का  किया आयोजन

बहराइच ।अवध वाटिका साहित्य मंच बहराइच के तत्वावधान में नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार में किया गया जिसकी अध्यक्षता आदरणीय डा0अशोकपाण्डेय गुलशन जी ने की,मुख्य अतिथि के रूप में जनपद बहराइच के अवधी फिल्म के कलाकार भाई राजेश मलिक उपस्थित रहे ।संचालन तिलक राम अजनबी ने किया। यह गोष्ठी जाने माने कवि /साहित्यकार अदम गोण्डवी जी की 77वीं जयंती को समर्पित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बहुत ही अच्छे छंदकार भाई राघवेंद्र त्रिपाठी जी की वाणी वंदना से हुआ ,तत्पश्चात नवोदित रचनाकार अर्पण शुक्ला ने पढ़ा -प्रीति की तूलिका से बँधे दो नयन, कब विलग हो गये कुछ पता न चला। शाश्वत सिंह पंवार ने पढ़ा -सभी को रास आने के लिए हम, सभी से दूर हो जाएंगे एक दिन। महीप चन्द कन्नौजिया ने पढ़ा -खिला उजड़े चमन में था मगर मैं फूल ताज़ा हूं, ये छोटी सी उमर में ही सदियों का तकाजा हूँ।राघवेंद्र नाथ त्रिपाठी ने पढ़ा -वे सो रहे हैं फाम के गद्दे पे चैन से, सुनके आहट दूर की मैं चौंक रहा हूँ। मेरी वफादारी को कुत्ता न समझना, मैं सबकी हिफाजत के लिए भौंक रहा हूँ। रईस सिद्दीकी ने पढ़ा -अंधेरा बांटने वाले तुम्हें मुबारक हो, चराग हमने जलाया है रोशनी के लिए। संचालक तिलक राम अजनबी ने पढ़ा -तुमसे मिला जबभी ग़म याद आया। कभी ज्यादा तो कभी कम याद आया। हास्य कवि पी0के0प्रचण्ड ने पढ़ा -चलव सड़किप मुला तुम किनारे रहव। खुद सम्हरव औ दुसरेक सम्हारे रहव। अंत में डा0अशोकपाण्डेय गुलशन जी ने पढ़ा -था कभी रिश्ता हमारे दरमियाना, अब न आती हैं कहीं से चिट्ठियां। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश मलिक ने अपनी कहानी का वाचन किया तथा रमेश चन्द्र मिश्र,राजकुमार अवस्थी, विनोद पाण्डे, संजय पासवान एड0,धनुषधारी चौरसिया एड0,विनोद कश्यप आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।*