लहराएगा तिरंगा इसी आन बान से, डॉक्टर यास्मीन मूमल,,,,


अनुराग लक्ष्य, 24 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन सहित विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपना काव्य पाठ करने वाली डॉटर यास्मीन मूमल आज अपनी मैयारी ग़ज़लों और गीतों की वजह अदब और साहित्य की दुनिया में अपना खास मुकाम रखती हैं।
मूलतः उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली डॉक्टर यास्मीन मूमल की प्रकाशित होने वाली पुस्तकों में , जुगल बंदी काव्य पुस्तक, जीवन के सुर काव्य संग्रह, महक अभी बाकी है काव्य संग्रह, संवेदना के स्वर काव्य संग्रह, भारत नेपाल काव्य सेतु संग्रह ,,सांझ,, और इसी के साथ शीघ्र प्रकाशित होने वाले ग़ज़ल संग्रह ,,भावों के मोती काव्य संग्रह ,, सांझा,,जल्द ही पाठकों की नज़्र होने वाला है।
मेरे विशेष आग्रह पर उन्होंने अपनी एक देश प्रेम से लबरेज़ ग़ज़ल अनुराग लक्ष्य को सप्रेम भेंट किया है। पेश है आपके रूबरू ।
1/ डंका बजा के बोल दो सारे जहान से।
कोई न उगले ज़हर अब अपनी जुबान से।।

2/ दुश्मन नज़र लगाते रहें कितनी भी मगर
लहराएगा तिरंगा इसी आन बान से।।

3/ लालच में आके ग़ैर का मत साथ दीजिए।
खेले न कोई अपने बुज़ुर्गों की आन से।।

4/ हुब्बे वतन का जोश न हो जिसके खून में।
उन सबको दूर रखिये दिलों के मकान से।।

5/ तक़रीर नफ़रतों की जो करता मिले यहां।
उसको उतार दीजिये जाकर मचान से।।

6/ उनको सबक़ सिखाना ज़रूरी है दोस्तों।
पलटी जो मार लेते हैं अपने बयान से।।

7/ समझाए जाके कोई ये नेता के भक्त को।
होगा भला न देश का झूठे बखान से।।

8/ नफ़रत की इस वतन में जो करते हैं खेतियाँ।
उनको निकाल फेंकिये हिन्दोस्तान से।।

9/ हम “यास्मीन” ठान लें इस दिल में जिस घड़ी ।
दुश्मन हमारे देश के जाएँगे जान से।।