तेरा चेहरा खुशियों का ज़ामिन रहे, नहीं देख सकता हूँ रोते. हुए-असलम तारिक

ग़ज़ल 

बहुत लोग देखे हैँ खोते हुए
अकेले में ऑंखें भिगोते हुए

है आसान रस्ता चले आईये
मुहब्बत की राहों से होते हुए

निदामत से मिलता है दिल को सुकूँ
गुनाहों को हर बार धोते हुए

तेरा चेहरा खुशियों का ज़ामिन रहे
नहीं देख सकता हूँ रोते. हुए

दिलों में हैँ ऐसे भी रिश्ते कई
गुज़र जाती उमरें हैँ ढोते हुए

नसीहत पे करते नहीं हैँ अमल
इसी वास्ते क़ैद तोते. हुए

ये अफसाना गम का है मैने लिखा
लहू में क़लम को डुबोते. हुए

कई लोग देखे हैँ इस दौर में
मोहब्बत के पौधों को बोते हुए

खुदा इनको दे होश अक़ले सलीम
वो जिनके हैँ जज़्बात सोते. हुए

ये सांसों की माला है तारिक़ मियाँ
रहो नेकियां इसमें पोते. हुए।।

असलम तारिक 

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