🌻🌻 ओ३म् 🌻🌻
🏵️ वेद पथ ही सु पथ है 🏵️
संत कबीर नगर जनपद के ग्राम गजाधर पुर में चल रहे 🥝 वेद-महोत्सव 🥝 के अंतिम सत्र में सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। आज संसार में अनेक मत पंथों के लोगको अनेक प्रकार की बातें बताकर समाज को विखंडित करने में लगे हैं।
कुछ लोग चाहते हैं कि संसार में सभी लोग मुसलमान बनें।जो इस्लाम व अल्लाह के पथ पर न चलें वो काफ़िर हैं। कुछ लोग चाहते हैं सब लोग ईसाई बनें और बाईबल की शिक्षाओं पर चल कर ईशा मसीह पर इमान लायें।
मगर केवल एक मात्र वेद और वैदिक धर्म ही है जो मानव बनने की प्रेरणा देता है। गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज जी इस बात को डंके की चोट पर कहते हैं।
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चलहिं कुपंथ वेद मगर छाड़े।
कपट कलेवर कलिमल भाड़े।।
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सोचिय विप्र जो वेद विहीना।
तज निज धर्म विषय लवलीना।
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वर्णाश्रम निज-निज धर्म।
निरथ वेद पथ लोग।।
गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन
से कहते हैं 🌿 वेदानां सामवेदोsहं 🌿 अर्थात् हे अर्जुन! वेदों में सामवेद ईश्वर का गुणगान करते हैं।
बाल्मीकि रामायण में महर्षि बाल्मिकी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के बारे में लिखा 🍁 वेद-वेदांग प्रवीण:🍁 अर्थात् श्री राम वेद -वेदांगों के मर्मज्ञ थे।
महर्षि मनु महाराज ने मनु -स्मृति में लिखा है……
वेदोsखिलोधर्ममूलम्🪷 अर्थात् वेद धर्म का मूल व आदि स्त्रोत हैं।१९ वीं शताब्दी में महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने संपूर्ण विश्व को एक नारा देते हुए कहा 📓 वेदों की ओर लौटो!📓 वे कहते थे वेद सब सत्य -विद्याओ की पुस्तक है।वेद का पढ़ना -पढ़ाना सब आर्यों का परं धर्म है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने वेदों को प्रमाण मानकर मानव के अंतर्राष्ट्रीय संबोधन 📙 आर्य 📙 इस नाम से दिया।
इतना ही नहीं प्रसिद्ध इतिहासकार व दार्शनिक मोक्ष मूलर ने कहा🌸 RIGVEDA IS THE OLDEST BOOK IN THE WORLD 🌸 अर्थात् विश्व के पुस्तकालय में अगर कोई सबसे प्राचीन ग्रंथ है तो वे 📗 ऋग्वेद 📗 ही हैं।
इसी ऋग्वेद के मंडल ५, सूक्त ५१/मंत्र में लिखा है ——
ओ३म् स्वस्ति पन्थामनुचरेम्।सूर्याचन्द्रमसाविव । पुनर्ददताघ्नता संगमेमहि ।।
अर्थात् हे मनुष्यों यह वेद पथ ही कल्याणकारी मार्ग है।इस वेद पथ पर तुम उसी प्रकार चलो। जैंसे सूर्य और चंद्रमा निरंतर उस परमात्मा की आज्ञा का पालन करते हुए अपने -अपने कर्मों में रात दिन लगे हैं।
अंत में वेद भगवान कहते हैं वेद मार्ग पर वही चल सकता है जिसमें तीन विशेषताएं हैं।
(१) सत्य ज्ञान की भूख (२) दानवीर (३) अहिंसा यानि प्राणि मात्र के लिए प्रेम।
इस कार्यक्रम में आर्य समाज मंदिर लालगंज के प्रधान गिरजा शंकर दूबे सपरिवार,उप प्रधान संतोष मोदनवाल, मंत्री सुभाष मोदनवाल, राजेन्द्र जी ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के प्रमुख सूत्रधार पंडित प्रेम चंद त्रिपाठी, प्रवीन त्रिपाठी रहे। लखनऊ से डाक्टर अरविंद कुमार त्रिपाठी सपरिवार यजमान बने और तन-मन-धन से सहयोग किया और कार्यक्रम शत-प्रतिशत सफल हुआ।
आचार्य सुरेश जोशी
🪷 वेदिक प्रवक्ता 🪷