जहाँ धौंस जमाते फिरते हों,खूब धड़ल्ले से अपराधी|
भ्रष्ट तंत्र के साथ खड़ी हो,जहाँ की आवादी आधी||
जहाँ पे अंगुली उठा रहे,न्याय व्यवस्था पे बुधिजिवी|
साथ खड़े आतंकी के,जहँ मानवाधिकार हो जाय सजीवी||
जहाँ बद्जुबान नेताओं के संग,चमचे करें देश बरवादी||
जहाँ हो रहा निशि दिन जमके,महिलाओं का खुब अपमान|
वहीं पे चिन्हित महिला के संग,जोड़ा जा रहा हो अति सम्मान||
जहाँ अपने अपने हित को ले,कर रहे देश की बरवादी|
जहाँ अभिव्यक्ति के नाम पे,बकवास कर रहे हों बकवादी|
जहाँ मासूमों का खून बहाके,मजे कर रहे हों अतिवादी||
जहाँ जेल से भी चल जाये,भ्रषटाचारी हो सरकार|
चमचे जहाँ सड़क बैठे,उसी के लिए करें तकरार||
उसी के लिए जान तक लें दें,छीन लें औरों की आजादी|
जज भी स्वसंज्ञान न लेते,कैसा बना हुआ है विधान|
अपराधी जहँ जेल में रहकर,लड़ले चुनाव कहता संविधान||
फिर भी देश बढ़ रहा है तो,यह करदाताओं की है आँधी|
देशद्रोहिए भ्रष्टाचारी ऐश कर रहे,पा आजादी||
विलख रही है तड़प रही है,पौना फीसद है आवादी|
वहीं पे गाया जाया रहा है,झूम झूम आई आजादी|
पं.जमदग्निपुरी