महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। तुलसी उद्यान मंच पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, संस्कृत विभाग उत्तर प्रदेश,उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित रामोत्तसव कार्यक्रम के अंतर्गत दिन शुक्रवार को पहली प्रस्तुती दोपहर के दो बजे राजस्थान के गणेश दास व दल द्वारा तेराताली नृत्य की प्रस्तुति दी यह नृत्य बाबा रामदेव के आराधना में किया जाता है ये नृत्य कर्मकांड के लिए करी जाती है ये महिलाओं के द्वारा किया जाता है साथ में पुरुष कलाकार तदुरा और ढोलक मंजीरा द्वारा बाबा रामदेव जी के भजन गाते हैं रुणीचा राजस्थान के जेसलमेर में बाबा रामदेवजी का स्थान है जिसकी प्रस्तुति बहुत अद्भुत रही । इसके पश्चात वाराणसी की सरोज वर्मा की लोक गायन “अवध में बजे सखी आज बधाइयां डम डम डमरू बजावेला”.. “सीताराम सीताराम कहिए जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए”.. “होली गीत- होली खेले रघुवीरा अवध में”.. की होली के भीनी भीनी रंगों से श्रोताओं को भिगो दिया। अगली प्रस्तुति प्रयागराज की मनीषा निरखी की प्रयागराज लोक गायन बाबा भोलेनाथ के जयकारे के साथ “सजी अवध की गलियां”..”शिव भजन सत्यम शिवम सुंदरम”.. केवट प्रसंग- “कैसे दिन कटीहे”.. श्री राम जानकी आदि भजन मीठी-मीठी तालिया से हाजिरी लगाते हुए प्रस्तुति दी । इसके पश्चात प्रयागराज के उदय चंद्र परदेसी के लोक गायन सोहर गीत- “बाजत अवध बधाइयां दशरथ घर सोहर हो”.. बधाई गीत -“जन्मे राम रघुरइया कौशल्या रानी दे दो बधाई”, “भजन -“सज गई अवध नगरी अवध में राम आ गए हैं” शबरी भजन -“साबरी बटिया जोहत दिन रात राम कुटिया मोर अईहे राम”, भगवान भोलेनाथ को याद करते हुए है शिव शंकर प्रलंयकर सुन लो अर्ज हमारी हम आए शरण तिहारी ओम नमः शिवाय होली गीत- होली है रंग बोरी है सभी तीन भुवन मा लहर राम, कृष्ण, शंकर जीव ब्रह्म की होली होली फाग चौथा भाग सारा रारा रा रंग बरसे झमाझम की प्रस्तुति बहुत ही जोरदार सभी दर्शक होली के रंग में शराबोर हो हो गए । इसके पश्चात
राजस्थान की प्रसिद्ध और पारंपरिक नृत्य जगदीश एव दल द्वारा भवाई नृत्य राजस्थान पश्चिम राजस्थान में जब पानी कमी थी उस समय महिलाएं अपने सिर पर एक से ज्यादा घड़े लेकर पानी लेने दूर दूर तक जाया करती थी लम्बे रास्ते को पार करने के लिए अलग-अलग प्रकार के गानों को गाया जाता था इसलिए भवाई नृत्य मे अलग अलग गीतों को गाया जाता है तो रास्ते में कठिनाइयां जेसे तपती रेत, कांच के टुकड़े, लोहे की कीलें, बबूल के कांटे आदि इसलिए भवाई नृत्य को कांच के टुकड़े, लोहे की कीलें, तलवार आदि पर प्रस्तुत किया जाता है जगदीश पंचरिया एण्ड पार्टी राजस्थान द्वारा भवाई नृत्य प्रस्तुत किया गया सिर पर दस घड़े लेकर भवाई नृत्य प्रस्तुत किया गया जिसे घूंघट में नृत्य किया जाता है इस नृत्य को शुभ और मांगलिक अवसरों पर किया जाता है जिसकी प्रस्तुति बहुत ही सुंदर रही । इसके पश्चात गोवा के कृपेश गांवकर के लोक नृत्य कुणबी नृत्य ये नृत्य गोवा के गावडा समाज के द्वारा किया जाता है। यह नृत्य फसल कटाई के समय किया जाता है जब महिलाये खेतो मे काम करने के बाद शाम का समय व्यथित करते है यह नृत्य खेती के आधार पर गाया जाता है पुरुष लोग घुमट कासाल बजाकर नृत्य को शोभा देते है घुमट जो है वो मिठ्ठी का बना होता है एक तरफ छेद और दूसरी तरफ घोरपडे का चमडा लगाया जाता है औरत का कपडा को देटली पहनावा कहते है । आखिरी प्रस्तुति पंजाब के
धर्मेंद्र सिंह व दल द्वारा भांगड़ा नृत्य का रहा जिसे खुशहाली के अवसर पर फसल पक कर तैयार होने पर जब इसका भंडारण कर लेते हैं तब बाजार में जाकर अपना जश्न को मनाने के लिए इस नृत्य को करते हैं यह नृत्य समूचे भारत में शुभ मांगलिक शादी विवाह आदि अवसरों पर किया जाता है जिसकी प्रस्तुति बहुत ही शानदार जोरदार रही। अंतिम प्रस्तुति प्रसिद्ध गायक पद्मश्री सुनील जोगी की गायन सायंकाल छ:बजे से देर रात्री तक चली इस अवसर पर उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किए।