अनुराग लक्ष्य 29 फरवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
ज़िंदगी और मौत के ताने बाने भी उतने ही सच हैं, जैसे कि यह चमकते चांद और सूरज । इसी फलसफे के साथ इंसान का आना और जाना भी सुनिश्चित होता है। और आज यह मंज़र सुप्रसिद्ध लेखक मेराज जैदी के साथ भी हुआ, वोह इस दुनिया को अलविदा कह गए।
इतिहास के पन्नो में गुम हो चुकी झांसी की रानी को छोटे पर्दे पर पुनर्जीवित करने वाले सुप्रसिद्ध कथा,पटकथा संवाद लेखक मेराज ज़ैदी ने अपने निज निवास दांदूपुर में भोर में 3 बजे अंतिम सांस ली। 76 वर्षीय श्री जैदी पिछले एक महीने से बीमार चल रहे थे। मेराज ज़ैदी के अंतिम समय में उनके पुत्र शोएब, शेखू और शेरू सहित पुत्रियां सुनैना और उजमा उपस्थित रहीं। श्री ज़ैदी ने झांसी की रानी, वीर शिवाजी, शोभा सोमनाथ की, आपकी अंतरा, राजा का बाजा सहित दर्जनों हिट धारावाहिकों के कथा, पटकथा, संवाद लेखक के रूप में कार्य किया। श्री ज़ैदी एक अच्छे लेखक होने के साथ साथ भारत के मशहूर नाट्य निर्देशक, गीतकार और अभिनेता थे। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म गोंगर -2 सहित कई धारावाहिकों एवं फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने हबीब तनवीर के साथ आगरा बाज़ार, मृतक बिहारी लाल हाज़िर हों, शहर में कर्फ्यू, रामचरन चोर जैसे कई शो किए। मेराज ज़ैदी के परम शिष्य और उनके सहायक लेखक के रूप में कार्य कर रहे लोक संस्कृति विकास संस्थान, प्रयागराज के निदेशक शरद कुमार मिश्र ने इस अवसर पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि इतनी बेबाक़ ज़िंदगी और ऐसा तरंगित शब्द-सागर इतनी ख़ामोशी से विदा होगा, कभी नहीं सोचा था! लेखन के मेरे सफ़र और काव्य-जीवन के क़िस्सों का एक बेहद ज़िंदादिल हमसफ़र हाथ छुड़ा कर चला गया। इलाहाबाद पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष हसन नक़वी ने श्री ज़ैदी की मौत को समकालीन लेखन और बड़े पैमाने पर एक अपूरणीय क्षति बताया। ग्लोबल ग्रीन्स के अध्यक्ष एवं उद्घोषक संजय पुरुषार्थी ने मेराज ज़ैदी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि लेखन की दुनिया के बादशाह ज़िंदगी की जंग हार गए। उनका जाना किसी पेड़ के पत्ते के झरने और फिर न उगने की तरह है।
मेराज जैदी के अंतिम यात्रा में लेखक, रंगकर्मी, कवियों सहित रिश्तेदार एवं ग्रामवासी भारी संख्या में उपस्थित रहे।
,,,शरद मिश्रा, प्रयाग राज ,,,