असम के कलाकारो द्वारा दिहानाम गायन से गूंजा अयोध्या का तुलसी उद्यान मंच

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या रामोत्तसव तुलसी उद्यान मंच पर रविवार को संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित रामोत्तसव कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश से आए कलाकारों ने अपनी जोरदार प्रस्तुतियां दी प्रथम प्रस्तुति नोएडा के
देवानंद झा रामविवाह गायन मिथिला के पारंपरिक गारी गीत से अभिवादन किया रामलला सन सुंदर बरके जुनी पढ़िएन कियो गारी जी.. राम जी का सोहर. गृह प्रवेश गीत रामजी के छियैन्ह घरडेरा…विदाई गीत कथिले प्रित लगेले रे जोगिया..दर्शको मे राममय भक्ति में माहौल हो गया गया इसके बाद प्रयागराज के राम बाबू के बिरहा बारहमासा लोकगायन रही अगली प्रस्तुति असम की मधुस्मिता तमंग धी नाम आई नाम दिहानाम असम के शंकरी संगीत से संबंधित संगीत की एक विशेष शैली है। श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव द्वारा रचित अन्य घोष-कीर्तनों की तरह, दिहानामास भी भगवान के गुणों, नामों और महिमाओं का जाप करते हैं। दिहानाम को शंकरदेव का बाद का योगदान माना जाता है। दिहा नाम, जो सामयिक संदर्भ का हिस्सा है, सात्र शादियों में प्रचलित है। इन्हें तिथि उत्सव के अवसर पर सत्रों में आयोजित होने वाली दिन भर की शादियों में प्रस्तुत किया जाता है। यह नाम भगवान की महिमा और कार्यों के बारे में गाया जाता है। सत्रों में प्रयुक्त ऐसे नामों के कई उदाहरण हैं– नमत शरण हरि अ संत शरण अ अंतकाले गति प्रभु तोमर चरण पद: नाम भज नाम चिंत नाम सार अ… यह नाम औणियाती, गढ़मुर, दक्षिणपत, कुरुबाहि सत्रों में किया जाता है।
इसके बाद अगली प्रस्तुति प्रयागराज के आयना बोस की लोकगायन रही इसके बाद राजस्थान के गौतम परमार की चरी नृत्य रही इसके बाद आगरा की श्री लोक गुंजन नृत्य नाटिका रही इसके बाद राजस्थान के हीरा नाथ कालबेलिया नृत्य रही इसके बाद महाराष्ट्र के अदिति साकर कोली नृत्य रही इसके अगली प्रस्तुति
राजस्थान के श्री कैलाश नारायण चकरी नृत्य रही।

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