सरयू के समानांतर बही भक्ति की धारा

 

 

सरयू किनारे अविस्थित राम कथा पार्क में श्रद्धा,भक्ति और उल्लास का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। देश के प्रख्यात कलाकार अपनी कला साधना के माध्यम से रामलला के दरबार में उपस्थित लगा रहे है।सांस्कृतिक कार्यक्रमों को श्रंखला में अंबेडकर नगर से आई कुमकुम यादव के दल ने भजनों से आरंभ किया। सबसे पहले सभी के मनोरथ को “रामजन्म भूमि  दिखाई दा पिया” गाकर व्यक्त किया इसके बाद “खेल रहे रघुरैया,दसरथ के महलवा” गाकर रामजी के बचपन को मंच पर जीवंत किया। पुष्प वाटिका का प्रसंग राम को देखकर जनक नंदनी से प्रस्तुत किया।दर्शक भक्ति में डूब कर रामरस का स्वाद चख रहे थे।

सरयू की शीतल जलधार के समांतर चल रहे कार्यक्रमों में मथुरा से आई जया सक्सेना के दल ने सबसे पहले ब्रज मंडल की आराधना गाकर स्तुति को इसके बाद भजन “कान्हा को मेरे है प्यारे सभी” गाकर द्वापर में श्रीहरि के अवतार को करुणा के दर्शन करा दिए।राधे राधे की गूंज में ब्रज के कलाकारो ने मयूर कुटी में मयूरो के ना मिलने पर राधा रानी की उदासी और फिर कन्हैया का मयूर बनकर नृत्य करना सभी को लुभा गया। गायकों द्वारा मयूर की बोली को दर्शक भी दोहराने लगे थे।

मंच से बहते उल्लास के प्रवाह को सभी महसूस कर रहे थे तभी शुभांगी सिंह से मंच पर अपने दल के साथ भरतनाट्यम शैली में अपनी प्रस्तुति रामचारित पर आधारित दिया। विशुद्ध भरतनाट्यम के बोलो पर महिला कलाकारो की थिरकन और घुंगरूओ की खनक पर सभी तालिया बजाने लगे। इसके बाद पुष्प वाटिका,सीता स्वयंवर, सीता हरण,अशोक वाटिका,सागर पर पुल बांधकर सेना का लंका पहुंचना और रावण वध के बाद राम सिया मिलन प्रस्तुत करके सभी को मोह लिया।अपने परिधानों और भावभंगिमाओ से हर प्रसंग मंच पर सजीव हो उठा था।
दर्शकों से भरे पांडाल में कार्यक्रम का संचालन भक्तिमय अंदाज में देश दीपक मिश्र ने किया।अंतरराष्ट्रीय रामायण एवम वैदिक शोध संस्थान के निदेशक डा लवकुश द्विवेदी ने कलाकारो का सम्मान स्मृति चिन्ह देकर किया। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक अतुल कुमार सिंह,दीपशिखा,ऋतिका,सुरेश कसोधन,श्रद्धा,लतिका,आकाश,जतिन समेत भारी संख्या में संतजन और दर्शक उपस्थित रहे

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