अयोध्या का बदलता स्वरूप महिलाओं और पर्यटकों की नजर में विकास के नए आयाम – पूजा सेठ

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। राम मंदिर के निर्माण के बाद से धार्मिक नगरी अयोध्या का कायाकल्प तेजी से हो रहा है। अयोध्या में हो रहे इस ऐतिहासिक बदलाव और विकास कार्यों को लेकर शोध कर रहीं पूजा सेठ ने मीडिया से खास बातचीत में अयोध्या की बदलती तस्वीर और यहाँ की महिलाओं की सोच पर खुलकर अपने विचार रखी। पहले और अब की अयोध्या में आया बड़ा बदलाव पूजा सेठ का कहना है कि जब वे पहले अयोध्या आती थीं, तो यहाँ का माहौल और व्यवस्थाएँ काफी अलग थीं। तब यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने, खाने और यातायात जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर काफी संकोच और परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। स्टेशन से बाहर आते ही श्रद्धालुओं को ई-रिक्शा और आसानी से बुक होने वाली कैब जैसी परिवहन सुविधाएँ मिल जाती हैं। इसके अलावा, आधुनिक मॉल्स और ब्रांडेड दुकानों के खुलने से न केवल पर्यटकों की राह आसान हुई है, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
महिलाओं की सोच और जीवनशैली में आई प्रगति
पूजा सेठ ने कहा अयोध्या के विकास का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू यहाँ की महिलाओं की सोच में आया बदलाव है। अब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना, मेहमानों से मिलना और शहर में आना-जाना बहुत सहज और सुरक्षित हो गया है। परिवहन और आधुनिक सुविधाओं की सुगमता के कारण अब लोग अयोध्या आने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करते। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन का असर राम मंदिर निर्माण के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों पर बात करते हुए पूजा सेठ ने कहा कि इनका अयोध्या के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। उनके निरंतर प्रयासों और यहाँ के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग के कारण ही अयोध्या हर दिन प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रही है।
सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, अन्य धार्मिक स्थलों का भी हो रहा विकास यह आम धारणा है कि अयोध्या का विकास केवल राम मंदिर तक सीमित है, लेकिन पूजा सेठ का मानना है कि यह सोच पूरी तरह गलत है। राम मंदिर के साथ-साथ शहर की छोटी-छोटी गलियों, अन्य प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का भी सुनियोजित विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का विकास अब एक सतत प्रक्रिया बन चुका है, जो सिर्फ चमक-धमक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके मूल ढांचे और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती दे रही है। शहर की आत्मीयता और यहाँ के लोगों का प्यार पर्यटकों को बार-बार अयोध्या आने के लिए विवश करता है।