स्वामी दयानंद विद्यालय सुरतीहट्टा में आर्य वीरांगना दल ने मनाई वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती
लवकुश सिंह संवाददाता
अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती
बस्ती। बस्ती के सुरतीहट्टा स्थित स्वामी दयानंद विद्यालय में आर्य वीरांगना दल बस्ती ने सोमवार को भारत की महान वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों ने उनके अदम्य साहस, देशभक्ति और प्रेरणादायी जीवन प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्य समाज नई बाजार बस्ती के प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन करते हुए कहा कि जब मुगलों की विशाल सेना को देखकर रानी के मंत्री ने उन्हें युद्ध न करने की सलाह दी थी, तब रानी ने दृढ़ता से कहा था कि कलंकित जीवन जीने की अपेक्षा शान से मर जाना अच्छा है। उन्होंने कहा कि 5 अक्टूबर 1524 को जन्मी रानी दुर्गावती का जीवन आत्मसम्मान और धर्म की रक्षा का अप्रतिम उदाहरण है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आदित्य नारायण गिरि ने रानी दुर्गावती के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान दुर्गावती ने गोंडवाना साम्राज्य का कुशलतापूर्वक संचालन किया। पति दलपत शाह के असामयिक निधन के बाद उन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर स्वयं शासन की बागडोर संभाली। उन्होंने अनेक मठ, कुएं और धर्मशालाएं बनवाईं तथा जबलपुर बरेला के पास नरई नाले के युद्ध में मुगलों से लोहा लेते हुए 24 जून 1564 को मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दे दी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षिका अनीशा मिश्रा ने
वीरांगना रानी दुर्गावती को कोटिशः नमन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों व छात्रों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।