चन्द्रशेखर सत्ता की ओर देखने वाले नेता नहीं थे-प्रोफेसर चितरंजन मिश्र

पुण्य तिथि पर याद किये गये पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर

चन्द्रशेखर सत्ता की ओर देखने वाले नेता नहीं थे-प्रोफेसर चितरंजन मिश्र

अपने सिद्धान्तों पर अडिग रहे चन्द्रशेखर-डॉ. रघुवंशमणि त्रिपाठी

राष्ट्रपति को भेजा जायेगा प्रस्ताव

बस्ती। गुरूवार को पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को उनकी 19 वीं पुण्य तिथि पर प्रेस क्लब सभागार में याद किया गया। चन्द्रशेखर जन्म शती समारोह समिति के संयोजक डॉ. हरीओम श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके विविध राजनीतिक जीवन के पक्षों पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रोफेसर चितरंजन मिश्र ने कहा कि चन्द्रशेखर सत्ता की ओर देखने वाले नेता नहीं थे। वे चाहते तो आपातकाल के दौरान गिरफ्तारी से बच सकते थे किन्तु तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रस्ताव को ठुकराकर उन्होने जेल जाने का रास्ता चुना। समाजवाद को लेकर सदैव वे निर्भीक रहे और उसके लिये प्रधानमंत्री होते हुये भी टकराव किया। जनतापार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी वे सदैव सादगी पसन्द रहे। उन्होने सत्ता के लिये कभी समझौता नहीं किया।

विशिष्ट अतिथि शिव हर्ष किसान पी.जी. कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रघुवंशमणि त्रिपाठी ने चन्द्रशेखर जी के जीवन के विविध पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि सीधे-सरल स्वभाव वाले चंद्रशेखर ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हालांकि पीएम के रूप में उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा। युवा तुर्क के नाम से मशहूर पूर्व पीएम चंद्रशेखर का 17 अप्रैल को जन्म हुआ था। वह पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने सीधे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि भारत के 8 वें प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर का ने कभी भी राजनीतिक अस्पृश्यता और असहिष्णुता के फेर में नहीं रहे। उनको राजनीति का अजातशत्रु कहा जाता था। आज जब सत्ता के लिये हर स्तर पर समझौता का दौर चल रहा है वे अपने सिद्धान्तों पर अडिग रहे।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. हरीओम श्रीवास्तव ने वर्तमान स्थितियों को लेकर एक प्रस्ताव रखा। इसे राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जायेगा।

पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, अम्बिका सिंह, राम सिंह, अजय सिंह, अखण्ड, राजकुमार पाण्डेय, अनिल कुमार सिंह, दीवान चन्द पटेल, मयंक श्रीवास्तव, सिराज अहमद खान, दीवान चन्द पटेल आदि ने पुण्य तिथि पर चन्द्रशेखर को नमन् करते हुये 1977 से आठ बार बलिया के सांसद रहे चंद्रशेखर 1984 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बलिया में लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ पत्रकार हरीश पाल ने कहा कि वह एक ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने युवा साथियों के जरिए देश को समाजवादी दिशा में ले जाने का काम किया था। फिर वह जयप्रकाश नारायण के साथ आकर खड़े हो गए, जिसकी कीमत उनको जेल जाकर चुकानी पड़ी।

कार्यक्रम में मुख्य रूप स डा.े अनिल कुमार श्रीवास्तव, श्रवण कुमार सिंह, सुधाकर शाही, प्रहलाद गुप्ता, चन्द्रिका यादव, मंगल नेता, वशिष्ठ गोयल, संजय, राजाराम यादव, डा. सत्येन्द्र सिंह, डा. संदीप मौर्य, डा. राजेश श्रीवास्तव, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव के साथ ही बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।