अनुराग लक्ष्य, 03 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
,,,,जगमगा उठता है गुलशन जिसकी आमद से यहाँ ,
प्यार से उनको सभी जगमग जी कहते है यहाँ,
ज़िंदगी की धूप में भी प्यार का साया हैं वोह,
दर्द के मातम भी हंसकर खूब सहते हैं यहाँ,
प्यार से उनको सभी जगमग जी कहते हैं यहाँ,,,,
जी हाँ, बस्ती के साहित्य में अपना अनोखा योगदान देने वाले सुप्रसिद्ध कवि एवम् हास्य व्यंग सम्राट डॉक्टर राम कृष्ण लाल जगमग के 74 वें जन्मदिन के शुभ अवसर पर 4 जुलाई को ज़िला पंचायत परिसर बस्ती में एक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया है। जिसमें चुनिंदा कवि एवम् शायरों की शिरकत से शाम सुरमई होगी।
साहित्यिक संस्था अदबी संगम के बैनर तले यह कार्यक्रम सुनिश्चित हुआ है। संयोजक दीपक सिंह प्रेमी ने इस अवसर पर बस्ती के साहित्य और अदब से जुड़े लोगों को गंगा जमुनी तहज़ीब की विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। जो बस्ती की सरज़मीन पर हमेशा होता आया है।
आपको बताते चलें कि जगमग जी विगत 40 वर्षों से देश विदेश के साहित्यिक मंचों पर अपनी उत्कृष्ट रचनाओं और दुमदार दोहों के लिए विख्यात हैं। जिन्हें आज भी बड़े चाव से श्रोता सुनते आ रहे हैं।
पेशकश,,,,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,