लखनऊ,। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने और पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकों से लैस करने के उद्देश्य से लखनऊ पुलिस द्वारा साइबर जागरूकता विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश शासन एवं पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के क्रम में पुलिस आयुक्त लखनऊ अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल की साइबर अपराधों की जांच, रोकथाम और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को और अधिक सशक्त बनाना था।कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार, पुलिस उपायुक्त (अपराध/लाइन्स) अनिल कुमार, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत तथा अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध, ट्रेनिंग सेल एवं लाइन्स) सुशील कुमार यादव की देखरेख में सम्पन्न हुआ।प्रशिक्षण कार्यक्रम में कमिश्नरेट के विभिन्न थानों पर नियुक्त वर्ष 2025 बैच के चयनित रिक्रूट आरक्षियों सहित कुल 58 पुलिसकर्मियों ने प्रतिभाग किया। साइबर सेल, कमिश्नरेट लखनऊ के उपनिरीक्षक राकेश मिश्रा एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को साइबर अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को एपीके फाइल के माध्यम से होने वाले साइबर फ्रॉड, मोबाइल एप्लीकेशन आधारित ठगी, फर्जी लिंक और डिजिटल धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), संचार साथी पोर्टल और अन्य महत्वपूर्ण साइबर प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण में मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण और उनके माध्यम से अपराधियों तक पहुंचने की तकनीकों पर भी प्रकाश डाला गया।इसके अतिरिक्त फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया मंचों के ‘लॉ एनफोर्समेंट ऑनलाइन रिक्वेस्ट सिस्टम’ की जानकारी देते हुए बताया गया कि किस प्रकार इन प्लेटफॉर्मों से आवश्यक सूचनाएं प्राप्त कर साइबर अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग से जांच प्रक्रिया को अधिक सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है।कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साइबर अपराध लगातार नए स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों का तकनीकी रूप से प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की रोकथाम, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की गईं।लखनऊ पुलिस का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पुलिस बल की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी और साइबर अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस बल ही डिजिटल युग की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है। इसी उद्देश्य के तहत भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।कार्यशाला के समापन पर अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मी साइबर अपराधों की जांच में नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग करेंगे, जिससे साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त होगी तथा आम नागरिकों को सुरक्षित साइबर वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।