महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । रामनगरी अयोध्या में बुधवार को फैजाबाद मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर एकदिवसीय बंदी का व्यापक असर देखने को मिला। व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज गुप्ता के नेतृत्व में बुलाई गई इस हड़ताल के कारण जनपद की तमाम थोक एवं फुटकर मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को दावों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पतालों के बाहर पसरा सन्नाटा, मरीज रहे परेशान बुधवार सुबह से ही श्रीराम अस्पताल, जिला अस्पताल समेत जनपद के कई प्रमुख चिकित्सीय केंद्रों के आसपास स्थित दवा दुकानों पर ताले लटके दिखाई दिए। दूर-दराज से आए मरीज और उनके तीमारदार आवश्यक दवाओं के लिए भटकते नजर आए। कई लोग अस्पतालों के बाहर इस उम्मीद में बैठे रहे कि शायद कोई दुकान खुले, लेकिन बंदी का असर इतना व्यापक था कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े मेडिकल स्टोरों को छोड़कर अन्य सभी दुकानें बंद रहीं।
ऑनलाइन दवाओं से स्वास्थ्य को खतरा पंकज गुप्ता हड़ताल की अगुवाई कर रहे व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि यह बंदी दवा व्यापारियों और आम जनता के व्यापक हित में की गई है। उन्होंने ऑनलाइन दवा बिक्री पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारी छूट का लालच देकर जो दवाएं बेची जा रही हैं, उनमें बड़ी संख्या में नकली दवाएं बाजार में पहुंच रही हैं। यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। बिना डॉक्टर के परामर्श और बिना वैध पर्चे के उपभोक्ताओं तक दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं, जो बेहद गंभीर और चिंता का विषय है। पंकज गुप्ता ने दवा निर्माण कंपनियों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कंपनियां अनियमित और मनमाने ढंग से दवाओं के दाम बढ़ा रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल एसोसिएशन की तीन प्रमुख मांगें। दवा व्यापारियों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मुख्य मांगें रखी हैं, जो इस प्रकार हैं।ऑनलाइन दवा बिक्री पर लगे सख्त नियंत्रण: इंटरनेट के माध्यम से बेची जा रही दवाओं की निगरानी हो। बिना पर्चे की बिक्री पर रोक: बिना डॉक्टर की वैध पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के दवाओं के वितरण पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
मूल्य वृद्धि पर अंकुश दवा कंपनियों द्वारा की जा रही मनमानी मूल्य वृद्धि पर लगाम कसी जाए।
आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
दवा व्यापारियों का साफ कहना है कि बुधवार की यह एकदिवसीय बंदी केवल एक चेतावनी है। यदि सरकार और संबंधित विभागों द्वारा उनकी जायज मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में दवा व्यापारी एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।