विश्व मातृत्व दिवस पर भजन संध्या का आयोजन सम्पन्न
विश्व मातृत्व दिवस के उपलक्ष्य में उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा दिनांक 06 मई 2026 को सायंकाल 05:30 बजे एक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर रचनाकारों ने अपनी माताओं द्वारा गुनगुनाए जाने वाले भजनों को श्रद्धा और भावनाओं के साथ प्रस्तुत कर मातृ स्मृतियों को सजीव कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंच की अध्यक्षा, कार्यक्रम संयोजिका एवं संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” द्वारा गणेश स्तुति एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
सर्वप्रथम शिखा खुराना “कुमुदिनी” ने “मेरा मुझमें कछु नाही, जो कुछ है सब तेरा” शबद प्रस्तुत किया। इसके पश्चात वरिष्ठ कवि डॉ. फूलचन्द्र विश्वकर्मा “भास्कर” ने “मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तिहारे आऊँ” सुनाकर भावविभोर कर दिया।
अनु तोमर “अग्रजा” ने “क्या लागे गोपाल मीरा तेरा” भजन प्रस्तुत किया।
आगे क्रम में सुनील खुराना की प्रस्तुति के पश्चात विनीता नरूला प्रसन्ना ने “मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान तुम्हारे चरणों में” सुनाया।
अमिता गुप्ता “सुरभि” ने मातृ शक्ति को नमन करते हुए “सीताराम-सीताराम कहिए” भजन प्रस्तुत किया।
इसके बाद माधुरी शुक्ला ने “बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे”, निशा कौल शर्मा “चंद्रिका” ने “अब सौंप दिया जीवन अपना” तथा वीना टंडन “पुष्करा” ने “भए प्रकट कृपाला” सुनाया।
नीरजा शर्मा “अवनि” ने “सुखी बसे संसार, सब दुखिया रहे न कोय” प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए रेखा पुरोहित “तरंगिणी” ने पहाड़ी जीवन में मातृ संघर्ष का मार्मिक वर्णन किया।
अंजू श्रीवास्तव “अंजनी”ने “फिर मत कहना कुछ कर न सके” तथा अरुण ठाकुर “कवित्त”ने “जानकीनाथ सहाय करे” एवं “पायो जी मैंने रामरतन धन पायो” को शास्त्रीय शैली में प्रस्तुत किया।
एकता गुप्ता “महक” ने “बांके बिहारी मुझको देना सहारा” और अनीता राजपाल “वसुंधरा” ने “जो मांगे ठाकुर अपने ते सोई सोई देवे” शबद प्रस्तुत किया।
रंजना बिनानी “स्वरागिनी” ने “तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान” भजन से समां बांध दिया।
पूरे कार्यक्रम का अत्यंत सुंदर, रोचक एवं भावपूर्ण संचालन डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” द्वारा किया गया। उन्होंने बीच-बीच में अपनी माताजी द्वारा रचित एवं गुनगुनाए गए भजनों—“दो घड़ी भगवान का नाम ले तू”, “इंसान जानकर इतना समझ न पाया” एवं “गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ”—से वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
कार्यक्रम के समापन पर मंच के उपाध्यक्ष सुरेश चन्द्र जोशी “सहयोगी” ने अपनी सासू माँ द्वारा गाए गए रिकॉर्डेड भजन “संकट हरेंगी करेंगी भली, वृषभान की लली” सुनाकर सभी रचनाकारों का आभार व्यक्त किया तथा अध्यक्षा की अनुमति से कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
लगभग दो घंटे तक चली यह भजन संध्या अत्यंत सफल, कर्णप्रिय और भावनात्मक रही। पुनः शीघ्र मिलने के आश्वासन के साथ कार्यक्रम का सुखद समापन हुआ।