भागवत कथा केवल धर्म नहीं, जीवन का विज्ञान है-डाॅ.धरणीधर जी महाराज 

भागवत कथा केवल धर्म नहीं, जीवन का विज्ञान है-डाॅ.धरणीधर जी महाराज

 

जितेन्द्र पाठक

सन्तकबीरनगर। विकास खंड बघौली के अंतर्गत ग्राम सभा उतरावल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानकथा यज्ञ के प्रथम दिवस अयोध्या धाम के सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता डाॅ.धरणीधर जी महाराज ने कहा कि भागवत माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता, अस्थायी हो जाता है। भागवत मरण मंगलमय होना बताती है। जीवन जिया कैसे जाय और यहाँ से जाया कैसे जाय का सम्यक बोध भागवत श्रवण से होता है। परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। आगे कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानन्द की प्राप्ति होती है। डाॅ.धरणीधर जी महाराज ने कहा भागवत श्रवण प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद् भागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य के सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है ओर हमारे सारे कार्य सफल होते है। ठीक उसी तरह बुरे कर्मों की राह के दौरान सम्पूर्ण बुरी शक्तियाँ हमारे साथ हो जाती है। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है। छल ओर छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दुध हमेशा फटेगा।छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है- निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम राय शशिकला राय पुर्व प्रधान मधुसूदन राय रमेश राय आनंद राय मंटु राय रिंकु राय अमित राय राहुल राय शेषनाथ पाण्डेय

सुरेंद्रनाथ राय फूलचंद राय समेत तमाम लोग मौजूद रहे।