पांचवें दिन भी गरजा आंदोलन: बंदोबस्त अधिकारी के खिलाफ चकबंदी कर्मियों का आर-पार का ऐलान

पांचवें दिन भी गरजा आंदोलन: बंदोबस्त अधिकारी के खिलाफ चकबंदी कर्मियों का आर-पार का ऐलान

 

‘हटाओ या ठप रहेगा काम’—कर्मचारी संगठनों की चेतावनी, पूरे मंडल से मिला समर्थन

 

धरने से थमी चकबंदी प्रक्रिया, किसानों की बढ़ी परेशानी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

 

जितेन्द्र पाठक

 

संतकबीरनगर। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी विनय कुमार सिंह के खिलाफ चकबंदी कर्मियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। मंगलवार 28 अप्रैल 2026 को धरना लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के चलते चकबंदी विभाग का पूरा कामकाज ठप हो गया है, जिससे जनपद भर में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल संघ, जनपद शाखा संतकबीरनगर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट ऐलान किया गया कि जब तक “तानाशाह व भ्रष्ट बंदोबस्त अधिकारी” को जनपद से नहीं हटाया जाता, तब तक न तो धरना खत्म होगा और न ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे। कर्मचारियों ने इसे सम्मान और अधिकार की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई है।

मंडल भर से मिला समर्थन, बढ़ा आंदोलन का दायरा

धरने को अब व्यापक समर्थन मिलने लगा है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलामंत्री राम सजन यादव, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ बस्ती के जिलाध्यक्ष जलालुद्दीन कुरैशी, पेंशनर्स समाज उ0प्र0 के मंडल अध्यक्ष विजय प्रताप पाल, रेलवे प्रांतीय कार्यकारी सदस्य व पूर्व मंडल संगठन मंत्री जलालुद्दीन कुरैशी समेत कई संगठनों के पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

नेताओं का अल्टीमेटम—अब नहीं तो कभी नहीं

धरना स्थल पर नेताओं ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी।

राम सजन यादव ने कहा, “यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो जिले का हर कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होगा।”

जलालुद्दीन कुरैशी ने दो टूक कहा, “यह लड़ाई अब आर-पार की है, अधिकारी हटे बिना धरना समाप्त नहीं होगा।”

धरना स्थल बना एकजुटता का केंद्र

धरने में चकबंदी लेखपाल संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आनन्द कुमार, संयुक्त मंत्री मुतेन्ज कुमार, संगठन मंत्री गौरव पाण्डेय, कोषाध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार यादव, मीडिया प्रभारी नरसिंह नारायण, रमेश्वर सिंह, धीरेन्द्र यादव, भूपेन्द्र कुमार मौर्य, चन्द्रप्रकाश मिश्र, राजेन्द्र प्रसाद यादव, राम कुमार, प्रीति मिश्रा, अवधेश कुमार सिंह, भोगेश कुमार, प्रशांत कुमार सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

इसके साथ ही चकबंदी कर्ता अनिल मणि त्रिपाठी, अमरमणि सिंह, नन्दलाल कुशवाहा, लिपिक संवर्ग की रुक्मणी पाण्डेय, पुष्पा लाल, मोहनलाल, परमानन्द माधवम ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

धरने को अटेवा जनपद संतकबीरनगर, सफाई कर्मचारी संघ सहित कई अन्य संगठनों का समर्थन भी मिला, जिससे आंदोलन और मजबूत होता दिख रहा है।

किसानों पर असर, प्रशासन की बढ़ी चुनौती

धरने के कारण चकबंदी विभाग से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। भूमि विवादों के निस्तारण, चकबंदी प्रक्रिया और नक्शा दुरुस्ती जैसे जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

अब यह आंदोलन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर कब तक इस गतिरोध का समाधान निकलता है और क्या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है।