पिता की गोद बनी नवजात के जीवन की ढाल

पिता की गोद बनी नवजात के जीवन की ढाल

25 दिन की कंगारू मदर केयर से स्वस्थ हुआ नवजात

कम वजन शिशुओं को चाहिए विशेष देखभाल

बहराइच, 28 अप्रैल। बलहा ब्लॉक के मथुरा गांव में एक पिता ने अपने नवजात बेटे को बचाने के लिए परंपरागत सोच से आगे बढ़कर मिसाल पेश की। पेशे से राजगीर मिस्त्री राजेश ने 25 दिनों तक रोज़ 8दृ10 घंटे बच्चे को सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर (केएमसी) दीकृऔर वही गोद उसके जीवन की ढाल बन गई।

सीएचसी नानपारा में बीते 30 सितंबर को मात्र 2000 ग्राम वजन के साथ जन्मे शिशु को सांस की समस्या के कारण एसएनसीयू रेफर किया गया, लेकिन परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए। चार दिनों में करीब 42 हजार रुपये खर्च हुए, फिर भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और वजन घटकर 1900 ग्राम रह गया।

घर लौटने पर आशा कार्यकर्ता कमला देवी ने गृह भ्रमण के दौरान परिवार को केएमसी अपनाने की सलाह दी। मां सुनीता को कान दर्द और बुखार होने के कारण पिता राजेश ने यह जिम्मेदारी संभाली और 25 दिनों तक रोज़ 8दृ10 घंटे बच्चे को सीने से लगाए रखा। इसका असर यह हुआ कि शिशु का वजन 1900 ग्राम से बढ़कर 2900 ग्राम हो गया। राजेश कहते हैं यह बिना खर्च का आसान और प्रभावी तरीका है, जिसमें सिर्फ समय और लगन की जरूरत होती है।

सुनीता बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं था, लेकिन सुधार देखकर उनका विश्वास बढ़ा और अब वे अन्य महिलाओं को भी इसके फायदे बता रही हैं।

कम वजन एक गंभीर चुनौती-

एसएनसीयू इंचार्ज डॉ. अली के अनुसार प्रदेश में हर 1000 में से करीब 43 नवजात जीवित नहीं रह पाते, जिनका प्रमुख कारण समय से पहले जन्म और जन्म के समय 2500 ग्राम से कम वजन है। हर साल बड़ी संख्या में ऐसे शिशु जन्म लेते हैं, जिनकी लंबे समय तक अस्पताल में देखभाल संभव नहीं हो पाती। ऐसे में कंगारू मदर केयर एक सशक्त और सरल उपाय बनकर उभरा है जो 90 प्रतिशत तक शिशुओं की स्थिति सुधारने, स्तनपान बढ़ाने और वजन वृद्धि में बेहद प्रभावी है।

हजारों शिशुओं को मिला जीवन का नया मौका-

सीएमओ डॉ. संजय कुमार के अनुसार, जनपद में केएमसी को बढ़ावा देने के लिए सभी सीएचसी में एक-एक बेड आरक्षित किया गया है और सीमित स्टाफ के बावजूद इसे सक्रिय रखने के प्रयास जारी हैं। साथ ही जिले के एसएनसीयू में 17-बेड का केएमसी वॉर्ड स्थापित है, जहां माताओं को इसकी प्रक्रिया और स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। पिछले चार वर्षों में 3500 से अधिक कम वजन और समय से पहले जन्मे शिशुओं को इससे लाभ मिला है।

क्या है कंगारू मदर केयर?-

इस विधि में शिशु को टोपी, मोजे और लंगोट पहनाकर मां या परिवार का कोई सदस्य उसे अपने सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखता है। इससे शिशु को प्राकृतिक गर्माहट, सुरक्षा और पोषण मिलता है। एक बार में कम से कम एक घंटे तक केएमसी देना लाभकारी होता है।

:ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः