उन्मुक्त उड़ान मंच पर आत्म शुद्धि के नवरात्र ःबारह दिन-बारह आयोजन  

उन्मुक्त उड़ान मंच पर आत्म शुद्धि के नवरात्र ःबारह दिन-बारह आयोजन

 

नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित “बारह दिन — बारह आयोजन” आध्यात्मिक साधना, साहित्यिक सृजन और सामूहिक ऊर्जा का सुंदर संगम सिद्ध हुआ। 16 से 27 मार्च 2026 तक चले इस आयोजन ने निरंतरता, अनुशासन और रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

प्रारंभिक तीन दिनों (16–18 मार्च) में “माता रानी के नवरात्र आए” विषय पर छंदमुक्त काव्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने नवरात्र के स्वागत को अत्यंत सजीव बना दिया। इसके पश्चात नौ दिवसीय “आत्म-शुद्धि के नवरात्र” आयोजन में माँ शैलपुत्री से लेकर माँ सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों को घनाक्षरी छंद में अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ अभिव्यक्त किया गया। प्रत्येक दिन लगभग 20 से 22 वीडियो प्रस्तुतियाँ प्राप्त हुईं और अधिकांश रचनाकारों ने देवी माँ के निर्धारित रंगों के अनुरूप परिधान धारण कर प्रस्तुति दी, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई।

इन आयोजनों का एक विशेष आकर्षण मंच के पुरुष रचनाकारों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। उन्होंने कभी दुपट्टा, कभी शर्ट, स्वेट शर्ट या टी-शर्ट के माध्यम से माता के रंगों के अनुरूप स्वयं को प्रस्तुत किया और रंग-नियम का सुंदर निर्वाह किया। यह समर्पण वास्तव में आयोजन की सबसे मनोहारी विशेषताओं में से एक रहा।

मंच का एक प्रेरणादायक पहलू यह भी रहा कि यहाँ उम्र की कोई सीमा दिखाई नहीं दी। वरिष्ठ रचनाकारों जैसे आ. स्वर्णलता सोन “कोकिला”जी, आ.अनु तोमर “अग्रजा” जी और आ. वीना टन्डन “पुष्करा” जी की सक्रियता और उत्साह सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना।

इस पूरे आयोजन में 70 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही, जिनमें से लगभग 20–22 रचनाकारों ने अनेक आयोजनों में निरंतर योगदान दिया। प्रत्येक आयोजन के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए जाने से कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित और संतुलित रहा।

“नवरात्र का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक समन्वय” तथा “नवरात्र उपवास दिनचर्या और खानपान में समन्वय” जैसे विषयों ने इस श्रृंखला को बौद्धिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तरों पर समृद्ध किया।

प्रतिदिन आयोजित एकल काव्य पाठ ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रातः 11:30 से 12:00 तथा सायं 6:00 से 6:30 बजे तक आयोजित इन सत्रों में रचनाकारों ने अत्यंत तैयारी और उत्साह के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति-रस से सराबोर बनाए रखा। यद्यपि इन सत्रों में श्रोता-रचनाकारों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही, फिर भी यह आशा बनी रहती है कि भविष्य में मंचीय परिवार की सहभागिता और अधिक सशक्त रूप में सामने आएगी।

इस संपूर्ण आयोजन में मंच की अध्यक्षा आ. डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” दीदी का मार्गदर्शन अत्यंत प्रेरणादायी रहा। सोने पर सुहागा यह रहा कि उन्होंने समय-समय पर आयोजनों की सुंदर समीक्षा करते हुए अपने वीडियो संदेशों में घनाक्षरी रचनाओं का गायन भी किया, जिससे मंच पर एक अलग ही उत्साह और रौनक का वातावरण बना। साथ ही पाँच समर्पित रचनाकारों ने आरंभ से अंत तक प्रत्येक प्रस्तुति को सुनकर और सार्थक प्रतिक्रियाएँ देकर सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यदि सूक्ष्म अवलोकन किया जाए तो अधिकांश प्रस्तुतियाँ भावपूर्ण और विषयानुकूल रहीं। कहीं-कहीं घनाक्षरी विधान में सुधार की संभावना अवश्य दिखाई दी, पर श्रद्धा और भावों की प्रामाणिकता ने इन सीमाओं को गौण बना दिया।

समग्र रूप से “बारह दिन – बारह आयोजन” साहित्य, साधना, स्वास्थ्य-जागरूकता और संगठन का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया। यह आयोजन नवरात्र की आध्यात्मिक ऊर्जा को साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली और स्मरणीय बनाने में सफल रहा।

 

विशेष शर्मा “सुहासिनी”