बस्ती, उत्तर प्रदेश | — विश्व जल दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में, ग्लोबल साइंस एकेडमी (GSA) ने आज ‘5+5 ओशन डिकेड कॉन्फ्रेंस’ की डिजिटल प्रोसीडिंग्स (कार्यवाही) लॉन्च की। यह आयोजन भारत और दक्षिण एशिया की समुद्री रणनीति (Maritime Strategy) में एक बड़े परिवर्तनकारी बदलाव का संकेत है।
यह तकनीकी चर्चा ईद के बाद सांस्कृतिक चिंतन और नवरात्रि के पवित्र त्योहार के दौरान आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने पारंपरिक आर्थिक विमर्श से ऊपर उठकर समुद्री कानून 2026 (Ocean Law 2026), सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवीय सुरक्षा के बीच के अंतर्संबंधों को संबोधित किया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए ग्लोबल साइंस एकेडमी के संस्थापक निदेशक और मुंसिफ टीवी के ब्यूरो हेड डॉ. अनिल प्रताप सिंह ने जल को केवल एक संसाधन के रूप में नहीं, बल्कि एक मौलिक ‘सभ्यतागत मूल्य’ (Foundational Ethos) के रूप में परिभाषित किया। ऋग्वेद के श्लोकों और महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री कानून 2026 का कार्यान्वयन समानता पर आधारित होना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा, “सार्वजनिक स्वास्थ्य को समुद्री कानून के भीतर समाहित किया जाना चाहिए। तटीय शासन बीमारियों, विस्थापन और शोषण की जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। आज, हम सिद्धांतों से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हाशिए पर रहने वाले लोगों—’ओशन विडो’ (समुद्री विधवाओं) से लेकर मछली पकड़ने वाले समुदायों—की आवाज़ वैश्विक रिकॉर्ड में दर्ज हो।”
कार्यक्रम में छह महत्वपूर्ण ढांचों (Frameworks) पर प्रकाश डाला गया, जो भविष्य में एकेडमी की वकालत की दिशा तय करेंगे:
1. लैंगिक न्याय और ‘ओशन विडो’: डॉ. शिल्पा नंदी और डॉ. सतरूपा पाल ने समुद्री त्रासदियों के कानूनी अंतराल में खोई हुई महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक अदृश्यता और तस्करी के प्रति उनकी संवेदनशीलता को उजागर किया।
2. तटीय बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य: डॉ. तुलिका चक्रवर्ती और डॉ. पत्राली सिन्हा ने हाशिए पर रहने वाले मछली पकड़ने वाले समुदायों में एचआईवी/एसटीआई (HIV/STI) देखभाल और प्रजनन स्वास्थ्य में मौजूद गंभीर कमियों को दर्ज किया।
3. स्वदेशी ज्ञान (Indigenous Knowledge): डॉ. सोमीरन दास और डॉ. सोमनाथ भट्टाचार्य ने टिकाऊ शासन के लिए समुदाय-संचालित और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य समाधानों पर जोर दिया।
4. नैतिक पर्यटन (Ethical Tourism): डॉ. सतरूपा पाल और डॉ. शिल्पा नंदी के शोध ने अनियंत्रित तटीय पर्यटन में निहित स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिमों के प्रति आगाह किया।
5. शहरी न्याय: डॉ. पत्राली सिन्हा और डॉ. तुलिका चक्रवर्ती ने तेजी से होते तटीय शहरीकरण के बीच मछली पकड़ने वाले समुदायों के हाशिए पर जाने की समस्या का विश्लेषण किया।
6. मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस: डॉ. आलोक राय और डॉ. सोमीरन दास ने राष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी को मानव तस्करी और अवैध मछली पकड़ने के नेटवर्क के खिलाफ सक्रिय लड़ाई से जोड़ा।
सत्र में विन्निपेग, कनाडा से डॉ. अवनीश जॉली ने “ग्लोबल नॉर्थ” का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे जल शासन में स्वदेशी ज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य को एकीकृत करने का ‘मेनिटोबा मॉडल’ दक्षिण एशियाई प्रणालियों के लिए मार्गदर्शक हो सकता है। ‘इन्वेंशन इंटेलिजेंस’ के पूर्व मुख्य संपादक डॉ. आर.के. अंथवाल का औपचारिक रूप से एकेडमी की आगामी डिजिटल पत्रिका ‘जीएसए साइंस कम्युनिकेशन’ के प्रबंध संपादक (Managing Editor) के रूप में परिचय कराया गया।
आज की तकनीकी चर्चा के निष्कर्षों को अंतिम डिजिटल प्रोसीडिंग्स में एकीकृत किया जाएगा और मुंसिफ टीवी के कार्यक्रम ‘ग्रीन टॉक विद अनिल प्रताप सिंह’ की एक विशेष त्रिभाषी श्रृंखला (हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू) में प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम पर वैश्विक जर्नल के लॉन्च की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।