अयोध्या राम कथा के रसपान से भावविभोर हुए भक्त, भगवान शिव के विवाह प्रसंग का हुआ सजीव वर्णन

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। ‘गौ संत परमार्थ सेवा’ के प्रमुख केंद्र चक्रवर्ती महाराज दशरथ के राजमहल (बड़ा स्थान) में भव्य आयोजन किया जा रहा है। विदुगद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कथा व्यास स्वामी नरहरि दास महाराज (भक्तमाल) अपने श्रीमुख से श्री राम कथा की अमृत वर्षा कर रहे हैं।कथा के मुख्य प्रसंग
कथा के दौरान स्वामी जी ने भगवान के विभिन्न स्वरूपों और प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
अद्भुत महिमा स्वामी जी ने बताया कि जहाँ-जहाँ प्रभु के चरण पड़े, वहाँ भक्तों का कल्याण हुआ। चाहे वह मिथिला में बहु (सीता जी) की प्राप्ति हो या वामन अवतार में तीन पग में त्रिलोक नापना।
शिव विवाह का प्रसंग: कथा में भगवान शिव के विवाह प्रसंग की विस्तृत व्याख्या की गई। व्यास जी ने बताया कि शिव जी की विचित्र बारात देखकर बच्चे भयभीत हो गए। भूत-प्रेत और पिशाचों को नृत्य करते देख हाथी-घोड़े तक भागने लगे। मैना जी का वात्सल्य जब माता मैना ने शिव जी के गले में लिपटे सर्प को फुफकारते देखा, तो वे डर के मारे आरती फेंक कर भाग खड़ी हुईं। इस प्रसंग को सुनकर श्रोता भावुक हो उठे। संतों की गरिमामयी उपस्थिति इस पुनीत अवसर पर अयोध्या के कई दिग्गज संतों और महंतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे। हनुमान गढ़ी के महंत माधव दास महाराज और महंत वीरेंद्र दास महाराज।सिद्ध पीठ विद्या कुंड के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेम शंकर दास महाराज। महंत तुलसीदास , पंडित विष्णु देव महाराज, और महामंडलेश्वर स्वामी श्री गोविंदाचार्य जी महाराज। तुलसी छावनी के पीठाधीश्वर स्वामी जनार्दन दास महाराज और अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ल ।