
*300 से अधिक एनजीओ प्रतिनिधि और सीएसआर प्रमुख जुटे, विकसित भारत @2047 के लिए मजबूत साझेदारी का संकल्प*
नई दिल्ली। सामाजिक परिवर्तन को नई गति देने और एनजीओ–सीएसआर साझेदारी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली में ‘आह्वान–तृतीय संस्करण’ का दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक एनजीओ प्रतिनिधियों, विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियों के सीएसआर प्रमुखों, नीति-निर्माताओं और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत में सामाजिक विकास का भविष्य अब बहु-हितधारक साझेदारी, पारदर्शिता और परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली पर आधारित होगा।
*दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ*
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. भास्कर चटर्जी (पूर्व आईएएस एवं पूर्व महानिदेशक, आईआईसीए) और डॉ. राजेश टंडन (संस्थापक अध्यक्ष, प्रिया एवं यूनेस्को सह-अध्यक्ष) ने दीप प्रज्वलित कर किया।
स्वागत भाषण विश्व युवक केंद्र के प्रोग्राम ऑफिसर मंजू नाथ ने दिया। विषय प्रवेश करते हुए केंद्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय शंकर सिंह ने कहा कि “आह्वान केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी का प्रतीक है।”
*“असंभव को संभव बनाना होगा” — डॉ. राजेश टंडन*
मुख्य अतिथि डॉ. राजेश टंडन ने अपने संबोधन में सामाजिक पूंजी और वित्तीय पूंजी के संतुलित समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि जमीनी संगठनों की समझ और कॉरपोरेट संसाधनों का सही संयोजन हो जाए तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने प्रभाव मूल्यांकन की सुदृढ़ व्यवस्था, क्षेत्रीय संवाद को मजबूत करने और समुदाय-केंद्रित विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
*₹36,000 करोड़ का सशक्त क्षेत्र, ₹1 लाख करोड़ की ओर बढ़ता कदम*
मुख्य वक्ता डॉ. भास्कर चटर्जी ने कहा कि एक समय था जब एनजीओ और सीएसआर को “ऑयल एंड वाटर” की तरह असंगत माना जाता था, लेकिन आज यह क्षेत्र लगभग ₹36,000 करोड़ का सशक्त इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह आंकड़ा ₹1,00,000 करोड़ वार्षिक स्तर तक पहुंच सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सीएसआर के अगले चरण में जवाबदेही, पारदर्शिता और मापनीय परिणामों को प्राथमिकता देनी होगी।
*विविध विषयों पर गहन चर्चा*
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक विकास के अनेक आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
अमोद के. कंठ ने स्वयंसेवी क्षेत्र की भूमिका को लोकतांत्रिक मजबूती से जोड़ा।डॉ. बिनीता वर्दिया ने स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी के सकारात्मक परिणाम साझा किए।0जयदीप बिस्वास ने डेटा-आधारित मूल्यांकन और समावेशन पर जोर दिया। डॉ. सुजीत रंजन ने मजबूत गवर्नेंस और परिणाम-आधारित प्रभाव मापन को अनिवार्य बताया। अशोक कुमार गुप्ता ने उद्योग-संरेखित कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता रेखांकित की। चेतन कपूर ने युवाओं में लचीलापन और संवाद-कौशल के विकास पर बल दिया। अरुण उपाध्याय और संदीप कुमार कटना ने पोस्ट-स्किलिंग समर्थन और रोजगार परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
मैथ्यू जोसेफ ने दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को सफलता की कुंजी बताया, जबकि मैथ्यू चेरियन ने एसडीजी और कॉरपोरेट प्राथमिकताओं के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। ममता सैकिया ने स्केलेबिलिटी, डॉ. नयन चक्रवर्ती ने रणनीतिक साझेदारी और चंदन वर्मा ने जमीनी क्रियान्वयन में सेतु निर्माण की भूमिका स्पष्ट की। जगदानंद ने उत्तरदायी साझेदारी को सतत प्रभाव की आधारशिला बताया।प्रवीण कर्ण ने आजीविका को गरिमा और स्थिरता से जोड़ा।हर्ष जेटली ने हरित तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया।के.पी. राजेन्द्रन ने ग्रामीण आय विविधीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। सारिका दीक्षित ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क की जानकारी साझा की। राजेश सिंह ने ग्रामीण स्वास्थ्य-आधारित आजीविका की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।
*उत्तर प्रदेश से भागीदारी*
उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित संगठन युवा विकास समिति के संस्थापक बृहस्पति कुमार पाण्डेय ने कहा कि यह मंच जमीनी संगठनों और कॉरपोरेट जगत के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
*विकसित भारत 2047 की दिशा में ठोस पहल*
कार्यक्रम के समापन पर इस बात पर सहमति बनी कि सतत और समावेशी विकास के लिए सरकार, कॉरपोरेट, सिविल सोसायटी और समुदायों के बीच पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत साझेदारी अनिवार्य है।
‘आह्वान–तृतीय संस्करण’ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि मापनीय सामाजिक परिवर्तन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक ठोस और प्रभावी कदम के रूप में उभरा है।