*स्वामी विवेकानन्द जी ने विश्व को भारत की महानता का दर्शन कराया – पुलिस क्षेत्राधिकारी*
_युवा दिवस पर विद्या मंदिर रामबाग में पूर्व छात्रों की संगोष्ठी आयोजित_
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग – बस्ती में विद्यालय के पूर्व छात्र परिषद के तत्वावधान में आज अपराह्न 3 बजे स्वामी विवेकानन्द जयंती के पावन अवसर पर “आज का युवा, भविष्य का भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दौड़, खेलकूद एवं सूर्य नमस्कार आसन भी संपन्न किए गए।
कार्यक्रम का प्रारम्भ स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पूर्व छात्रों द्वारा पुष्पार्चन से किया गया। विद्यालय के संगीताचार्य श्री प्रकाश चौबे ने संस्कृत वन्दना प्रस्तुत की। अतिथि परिचय भावेष पाण्डेय ने कराया। मंच पर बस्ती पुलिस के क्षेत्राधिकारी श्री सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक श्री सर्वेन्द्र जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह और युवा समाजसेवी पूर्व छात्र परिषद के मंत्री भावेष पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी मंचासीन अतिथियों का स्मृति चिह्न और अंग वस्त्र से सम्मान किया गया।
भावेष पाण्डेय जी ने संगोष्ठी की उपादेयता पर प्रकाश डाला। पूर्व छात्रों ने इस विद्यालय के द्वारा दिये गये शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की भी बात की।
जिला प्रचारक जी ने भी वर्तमान सन्दर्भों के साथ स्वामी विवेकानंद के शिकागो प्रवचन को जोड़ते हुए युवाओं को देश प्रेम के भाव से जोड़ा और संघ के वर्तमान काल में चल रहे पंच परिवर्तन की चर्चा की और विस्तार से बताया। पंच परिवर्तन के पांच प्रण हैं- सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक परिवार जीवन शैली, स्वदेशी भाव का जागरण और नागरिक कर्त्तव्यों का बोध। ये पांच प्रण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समाज परिवर्तन के प्रयासों का हिस्सा हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह जी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और ईश्वर के प्रति जिज्ञासु भाव रखते थे। कम आयु में ही उन्होंने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का परचम लहराया। उन्होंने विवेकानंद के जीवन की कई प्रेरक घटनाओं का उल्लेख किया।
पुलिस क्षेत्राधिकारी श्री सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि प्रकृति ने भारत को छः सुन्दर ऋतुएं प्रदान की हैं। विदेशियों ने भारत को संपेरों और मदारियों का देश बताया और भारत में बुरी तरह पराजित हुए सिकंदर को महान बताया। स्वामी जी ने विश्व को भारत की महानता का दर्शन कराया। उन्होंने आगे कहा कि हमें नकारात्मक तत्व में भी सकारात्मक तत्व खोजना होगा। बुरे को अच्छा बनाने की शक्ति हममें है। इसके लिये हमें मन और शरीर को मजबूत बनाना होगा, अपनी सामर्थ्य को खोजना होगा।
उन्होंने यह भी कहा हमें स्वयं, व्यक्ति, परिवार व कुछ अन्य लोगों को बुराई से अच्छाई में परिवर्तित करना होगा। इसके लिये हमें स्वयं से शुरुआत करनी होगी। जरूरतमंद लोगों की चुपचाप सहायता करें और यथासंभव समाज को सहयोग प्रदान करें। तभी हम स्वामी विवेकानंद के भारत के सपनों को साकार कर सकेंगे।
संगोष्ठी का संचालन पूर्व छात्र रविकांत मिश्र और आगंतुकों के प्रति आभार प्रदर्शन दीपक सिंह जी ने किया।