मेरा नवादा: मेरी पहचान – ज्योती वर्णवाल 

मेरा नवादा: मेरी पहचान

पंद्रह वर्षों का साथ हुआ, अब यह मेरा संसार है,

नवादा की इन गलियों से, मुझे अटूट प्यार है।

माना कि छोटा है शहर, पर दिल इसका विशाल है,

हर ख़ुशी यहाँ सिमट जाती, ऐसा इसका हाल है।

पंद्रह साल की यादें मेरी, इस मिट्टी में बसती हैं,

यहाँ की शामें, यहाँ की सुबहें, अपनों संग हँसती हैं।

इसी शहर की आब-ओ-हवा ने मुझको नया सम्मान दिया,

कवयित्री ‘ज्योति वर्णवाल’ को एक नया आसमान दिया।

इस शहर ने मुझको मेरे नाम से पहचान दिलाई है,

मेरी कलम को ताकत और शब्दों को गहराई दी है।

सब कुछ अपना सा लगता है, सब कुछ इसमें समाया है,

नवादा ने हर मोड़ पर, मुझ पर प्यार लुटाया है।

छोटा होकर भी यह शहर, सारा प्यार समेट लेता है,

मेरे हर एक सपने को, यह नई उड़ान देता है।

 

ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)

मेरी स्वरचित रचना—