माता-पिता को समर्पित 

माता-पिता को समर्पित

‘विमला ज्ञान साहित्य मंच’ पर ‘विश्व हिंदी दिवस’ काव्य गोष्ठी संपन्न, अरविंद कुमार अनोखे’ मार्गदर्शक मनोनीत

 

माता-पिता/ सास-ससुर की स्मृतियों को जीवंत रखने के उद्देश्य से अंजू श्रीवास्तव/ सुधीर श्रीवास्तव द्वारा स्थापित ‘विमला ज्ञान साहित्य मंच’ पर ‘विश्व हिंदी दिवस’ के उपलक्ष्य में एक आभासी काव्य गोष्ठी का  ‘आयोजन 04 जनवरी ‘2026 को किया गया। गोष्ठी अपराह्न 04.00 बजे से शाम लगभग 06.15 बजे तक निरंतर गतिमान रहकर भव्यता के साथ संपन्न हुई।

 

काव्यगोष्ठी का शुभारंभ कवि डा. निधी बोथरा जैन की वाणी वंदना से हुआ। तत्पश्चात मंच संरक्षक डा. सुधीर श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में मंच के नव मनोनीत मार्गदर्शक के रूप में युवा कवि/शिक्षक अरविंद कुमार अनोखे’ के नाम की घोषणा कर उन्हें बधाई देते हुए मंच के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विमला ज्ञान साहित्य मंच संस्थापिका अंजू श्रीवास्तव ने अपने माता-पिता और सास ससुर की स्मृतियों को सहेजने और नवोदित रचनाकारों को प्रेरित करने के उद्देश्य से किया गया है। मार्गदर्शक अरविंद कुमार ‘अनोखे’ अपने संबोधन में आयोजन में शामिल सभी सम्मानित मनीषियों का स्वागत करते हुए अपने मनोनयन हेतु मंच और मंच परिवार का आभार धन्यवाद किया। संयोजिका डा. निधी बोथरा जैन ने आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि मंच  आभासी काव्य गोष्ठी के अलावा विशिष्ट विभूतियों पर लेखन और साझा संकलन के प्रकाशन की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है।

 

तत्पश्चात् काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ। लगभग 25 कवियों /कवयित्रियों ने नव मनोनीत मार्गदर्शक अरविंद कुमार अनोखे’ को बधाइयां शुभकामनाएं देते हुए ‘विश्व हिंदी दिवस’ विषयक रचनाओं कीअपनी मनमोहक, उल्लासपूर्ण प्रस्तुतियों से काव्य गोष्ठी को ऊँचाइयों तक पहुँचाया।डा. निधी बोथरा

जैन एवं अरविंद कुमार अनोखे’ ने कुशल मंच संचालन के द्वारा काव्यगोष्ठी को सफलता प्रदान की।

 

अंत में वरिष्ठ कवयित्री/शिक्षिका शशिकला श्रीवास्तव ने आयोजन के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंच परिवार और उपस्थिति कवियों/ कवयित्रियों का आभार धन्यवाद किया, जबकि मंच मार्गदर्शक अरविंद कुमार अनोखे’ ने आभार ज्ञापन के साथ गोष्ठी के विराम की घोषणा की।

आयोजन को सफल बनाने में  विभिन्न मंचों के पदाधिकारियों, वरिष्ठ कवियों, कवयित्रियों सुरेश बन्छोर, ललित तिवारी, सरिता श्रीवास्तव, राम-लखन वर्मा आदि का सराहनीय योगदान रहा। सभी पदाधिकारियों और शुभचिंतकों की सक्रिय  गरिमामय उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाने में सफलता प्राप्त हुई।