निर्माण श्रमिकों के कौशल उन्नयन की दिशा में बड़ा कदम, पीएलएस योजना का शुभारम्भ

लखनऊ उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना के अंतर्गत पीएलएस (रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग) योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के उद्देश्य से 23 दिसंबर 2025 को ओमेक्स रिपब्लिक, अर्जुनगंज, लखनऊ से योजना का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग के मंत्री द्वारा कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया।प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक श्रमिक का जीवन सुरक्षित, सशक्त और सम्मानजनक बने। इसी सोच के तहत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा निर्माण श्रमिकों की कौशल दक्षता बढ़ाने और तकनीकी उन्नयन के लिए यह योजना संचालित की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी गई कि वर्तमान में बोर्ड के अंतर्गत प्रदेश भर में लगभग एक करोड़ 89 लाख निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं, जो इस योजना से लाभान्वित होने की पात्रता रखते हैं।इस योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को पीएलएस के अंतर्गत आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए बीओसीडब्ल्यू बोर्ड एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके माध्यम से श्रमिकों को उनकी पूर्व दक्षताओं के आधार पर उन्नत प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें प्रमाणित किया जाएगा।योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के सात जनपदों गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और झांसी में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस चरण में कुल एक लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके अंतर्गत पहले फेज में 20 हजार श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्रदाता संस्था के रूप में निटकॉन लिमिटेड, जो एक सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था है, द्वारा यह प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।प्रशिक्षण अवधि के दौरान श्रमिकों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई न हो, इसके लिए बीओसीडब्ल्यू बोर्ड द्वारा मजदूरी हानि की भरपाई डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में की जाएगी। इससे प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों की आय प्रभावित नहीं होगी और वे पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत श्रमिकों को एनसीवीईटी से प्रमाणित प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा, जो देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्य होगा। इससे श्रमिकों को कुशल श्रेणी के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सुलभ होंगे, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम्, विशेष सचिव श्रम कुणाल सिल्कू, बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की सचिव पूजा यादव, निटकॉन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सतविंदर सिंह, डीटीएनबीडब्ल्यूईडी के क्षेत्रीय निदेशक प्रमोद कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में निर्माण श्रमिक उपस्थित रहे।