लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के अस्थायी, स्थायी एवं कान्हा गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के सुव्यवस्थित भरण-पोषण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत 7560 गो आश्रय स्थलों में लगभग 12.36 लाख निराश्रित गोवंश को संतुलित एवं समान स्तर का आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।पशुधन विभाग के अनुसार, गोवंश के भरण-पोषण के लिए विभिन्न जनपदों में भूसा, हरे चारे और साइलेज अलग-अलग दरों पर क्रय होने से असुविधा उत्पन्न हो रही थी। इसको देखते हुए नए दिशा-निर्देशों में प्रति पशु औसत आहार मात्रा निर्धारित की गई है। प्रत्येक गोवंश को निर्धारित 50 रुपये की सीमा के अंतर्गत तीन किलो भूसा (7-8 रुपये प्रति किलो), पांच किलो हरा चारा (2.50-3 रुपये प्रति किलो) और 500 ग्राम संतुलित पशु आहार (21-22 रुपये प्रति किलो) दिया जाएगा। यदि हरे चारे की उपलब्धता न हो तो तीन किलो साइलेज (8 रुपये प्रति किलो), दो किलो भूसा और 500 ग्राम पशु आहार प्रदान किया जा सकता है।आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर जनपद में आपूर्ति किए जाने वाले साइलेज, हरे चारे और पशु आहार की समय-समय पर विभागीय अथवा कृषि विश्वविद्यालयों की पशु पोषण प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाएगी। विशेष रूप से हरे चारे में चरम एचसीएच की विषाक्तता की जाँच और उससे बचाव की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।स्थानीय किसान और टेंडर व्यवस्था के तहत जहां गोचर भूमि पर हरा चारा उगाया जा रहा है, वहां के साथ-साथ वर्ष भर उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय हरा चारा उत्पादक किसानों को चिन्हित कर एमओयू के माध्यम से निर्धारित दर पर चारा खरीदा जाएगा। भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा।आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भूसा, साइलेज और पशु आहार के टेंडर प्रत्येक दशा में 31 मार्च 2026 तक निष्पादित किए जाने हैं। इसके साथ ही, जनपदों में व्यापक मार्केट सर्वे के आधार पर क्रय दरों का संज्ञान लिया जाएगा। यदि किसी जनपद में भूसा/साइलेज की क्रय अनुबंध दर स्थानीय या समीपस्थ जनपदों से अधिक हो, तो कम दर वाले समीपस्थ जनपद से ही खरीद सुनिश्चित की जाएगी।शासन स्तर से सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपरोक्त दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करें और गो आश्रय स्थलों में गोवंश के संतुलित पोषण को प्रभावी ढंग से लागू करें।