शीर्षक:- स्वेटर और शाल
स्वेटर और शाल में छुपी होती है कई कहानियां।
गुजरे जमाने के बीते बचपन की सब निशानियां।।
समय के बदलते ही पीछे रह जाती है यह कहानियां।
अपने परायों की ना जाने ,कितनी यादें निशानियां।।
दिल में कितनी याद संजोए और कितनी कहानियां।
प्यार के धागों से बुनी हुई स्वेटर रहती है निशानियां।।
प्रेमी जब प्रेमिका के लिए लाता है शाल और स्वेटर।
बन जाती हैं कई अफसानों से जुड़ी नई कहानियां।।
सर्दियों में जब ये शॉल स्वेटर जब बाहर निकलते हैं।
संग अपने लाते बीते हसीन पलों की होती कहानियां।।
हर सर्दी में बुनती हूं मैं उसके लिए “कशिश” सा स्वेटर।
रेशों रेशों में होती है हमारे अटूट रिश्ते की गहराइयां।।
7 January 2025
स्वरचित (मौलिक)
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार
It’s my thoughts…. Meri khwahish tumhari Khushi….
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