बस्ती: नौकरी की तलाश में विदेश गए जिले के 33 नागरिकों के साइबर गुलाम बनने का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इन युवाओं को दक्षिण पूर्व एशिया के देश वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड, म्यांमार, लाओस और कंबोडिया जैसे देशों में अच्छी सैलरी वाली नौकरियों का झांसा देकर बुलाया गया था, लेकिन वहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन भारत और अन्य देशों के नागरिकों के साथ साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह एक विशाल अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर अपराध रैकेट है जो मुख्य रूप से चीन और ताइवान के नागरिकों द्वारा संचालित किया जा रहा है।जनपद के बेरोजगार युवाओं को इंटरनेट मीडिया और आनलाइन जाब पोर्टल के माध्यम से डेटा एंट्री या कालिंग जाब का लुभावना आफर दिया जाता है। विदेश पहुंचते ही पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं, और उन्हें एक चारदीवारी वाले परिसर में रखा जाता है जहां उन्हें 12 से 15 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। पीड़ितों को आनलाइन ट्रेडिंग क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, इन्वेस्टमेंट स्कैम व गेमिंग, ठगी जैसे साइबर अपराधों को अंजाम देने की ट्रेनिंग दी जाती है। इनकार करने पर उन्हें बिजली के झटके और भूखे रखने जैसी यातनाएं दी जाती हैं। जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े वित्तीय और संचार नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई की है। अब तक 33 नागरिकों को स्लेवरी यानी साइबर दासता में चिंहित किया जा चुका है। इनमें 14 को ट्रेस कर लिया गया। 19 की छानबीन की जा रही। इसके अलावा दूतावासों और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के पांच नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू करा लिया है, लेकिन 33 नागरिकों सुरक्षित वापसी के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ये मामले बेहद गंभीर हैं और इन युवाओं को जबरन साइबर अपराध की दलदल में धकेला जा चुका है। साइबर ठगी से अर्जित की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए उपयोग किए जा रहे 355 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर उस पर साइबर टीम काम कर रही है। इन खातों में करोड़ों रुपये की संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। इसमें 147 खातों की जांच पूरी की जा चुकी है। इस मामले में बैंक मैनजर व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। जल्द ही ये लोग सलाखाें के पीछे नजर आएंगे।