भागवत कथा के श्रवण से जीवन का होता है उद्धार- सत्यम सांकृत

क़ुदरहा, बस्ती। कुदरहा विकास खंड के छरदही गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस के दिन काशी धाम से पधारे राष्ट्रीय कथा वाचक सत्यम सांकृत महराज नें  श्रद्धांलुओं को भगवान के सभी  विवाहो का प्रसंग सुनाया। सुदामा चरित्र कथा के माध्यम से व्यास जी नें बताया की भगवान अपने भक्तों का भाव देखते हैं। भगवान की प्रप्ति के लिए साधन बाधक नहीं है। श्रीकृष्ण और सुदामाजी क मित्रता मानव सभ्यता के लिए मित्रता की अनूठी मिशाल है। सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र की विपत्ति में साथ दे और उसे अपने से नीचे ना रखें बल्कि उसे समक्ष बना दे।उन्होंने बताया कि भागवत कथा का श्रवण करने से जीवन का उद्धार हो जाता है। राम कथा जहां हमें जीवन जीना सिखाती है। वही श्रीमद् भागवत की कथा हमें मरना सिखाती है। कथा का समापन सुखदेव जी महाराज के द्वारा परीक्षित जी महाराज को सुंदर उपदेश देते हुए समाप्त हुआ।
    कथा में यजमान हरेंद्र प्रसाद दुबे, परमानंद तिवारी, आनंद दुबे, सतीश तिवारी, वशिष्ठ दुबे, मदन मोहन दुबे, बाबूराम दुबे, सुनील दुबे, राकेश दुबे, धीरेंद्र दुबे, अजय मिश्रा, अमित विक्रम, शार्दुल सम्राट, देव दुबे, शिवम दुबे, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।