उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तकाचार्य श्रीचंद्र भगवान की 531वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। रामनगरी की प्राचीन पीठ, उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानाेपाली, में उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तकाचार्य जगतगुरु श्रीचंद्र भगवान की 531वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जयंती महाेत्सव को वर्तमान पीठाधिपति महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। सोमवार की सुबह, सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह में देवी-देवताओं और जगतगुरु श्रीचंद्र भगवान का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद विविध पकवानों का भोग लगाकर भव्य आरती उतारी गई। दोपहर 12 बजे संत-महंतों, धर्माचार्यों और भक्तों ने जयंती महोत्सव का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान पूरा उदासीन आश्रम वेदमंत्रों से गूंज उठा और चारों ओर उत्सव की अनुपम छटा बिखरी रही। पूरा मंदिर प्रांगण श्रद्धा, भक्ति और आस्था की त्रिवेणी में सराबोर हो गया। इस पावन अवसर पर मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे प्रांगण को भांति-भांति के सुगंधित फूलों से सजाया गया था, जिसकी आभा देखते ही बन रही थी। सभी श्रद्धालु इस उत्सव में डूबकर अपना जीवन धन्य महसूस कर रहे थे और पुण्य के भागी बने। अंत में, उदासीन आश्रम के महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज ने आए हुए सभी संत-महंतों, धर्माचार्यों और विशिष्टजनों का स्वागत-सत्कार किया। महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज ने बताया कि उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तकाचार्य की यह 531वीं जयंती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। यह जयंती हर वर्ष भादो शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है, और इसी परंपरा के अनुसार इस बार भी उत्सव का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा और धर्म की रक्षा के लिए भगवान आचार्यों के रूप में पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। उस समय आचार्य श्रीचंद्र भगवान ने जन-जन तक अपने वेदों के सिद्धांतों का पूरे भारतवर्ष में प्रचार-प्रसार किया। आज भी हमारे सनातन वैदिक परंपरा के सभी संप्रदायों का एक ही उद्देश्य है कि सनातन धर्म की ध्वजा पूरे विश्व में फहराती रहे।
इस अवसर पर आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला के महंत मैथिलीरमण शरण, रंगमहल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बावन मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभ शरण, दिगंबर अखाड़ा के उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास सहित कई अन्य प्रमुख संत-महंत और भक्तजन उपस्थित रहे।