उसके लफ़्ज़ों में धार बाक़ी है

उसके लफ़्ज़ों में धार बाक़ी है
दिल में कोई दरार बाक़ी है

आरज़ू को तो क़त्ल कर डाला
सिर्फ़ ज़िद का शिकार बाकी है

तू हमे छोड़ जा नहीं सकता
तेरी आँखों में प्यार बाक़ी है

तुझको इक बार मात देनी है
तुझ पे मेरा उधार बाक़ी है

फूल मुरझा रहे हैं गुलशन में
पर चमन में बहार बाक़ी है

किसकी उम्मीद है “किरण” तुझको
क्या कोई जाँ निसार बाक़ी है
©डॉ कविता”किरण”✍️
Dr Kavita “Kiran” Kavita Kiran Koffee with “Kiran”