बहराइच । अवध वाटिका साहित्य संस्थान (पंजी0)बहराइच के तत्वावधान में आयोजित नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार में किया गया जिसकी अध्यक्षता आदरणीय राम सागर राव जी ने की संचालन तिलक राम अजनबी ने किया। डा0दिनेश त्रिपाठी शम्स मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ विनोद पाण्डेय जी के द्वारा माँ सरस्वती की वंदना से हुआ फिर नवोदित रचनाकार महीप चन्द कन्नौजिया ने पढ़ा -छोटे से दिल में गम बहुत है। ज़िन्दगी में मिले जख्म बहुत हैं। मार ही डालती कब की ये दुनिया हमें, किंतु दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है। फिर सुनील कुमार ने पढ़ा -भगवान तेरे संसार में ऐसा क्यों होता है। कोई रहता महलों में कोई सड़कों पर सोता है। तत्पश्चात अयोध्या धाम से पधारे कवि संतोष अकेला ने पढ़ा -तरस गए थे नैन हमारे आओगे कब मिलने तुम, करती हो हर रोज बहाना आदत है या ऐसे ही। गजल के सशक्त हस्ताक्षर रईस सिद्दीकी ने पढ़ा -मेले में मेरे बच्चे छुपा लेते हैं आँसू, कुछ जिद नहीं करते हैं समझदार बहुत हैं। फिर संचालक तिलक राम अजनबी ने पढ़ा -जिनके दिलों में प्यार का उल्लास नहीं है। करुणा, दया,क्षमा का भाव पास नहीं है। हम कैसे कहें उसको इंसान अजनबी, जिसमें किसी के पीर का एहसास नहीं है।तत्पश्चात अवध वाटिका साहित्य संस्थान के अध्यक्ष पी0के0प्रचण्डजी ने पढ़ा -मंहगाई का मूल रही है, जनता के प्रतिकूल रही है। भ्रष्ट आचरण के दलदल में मंहगाई फलफूल रही है। फिर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डा0दिनेश त्रिपाठी शम्स ने पढ़ा -व्यवस्था में रद्दोबदल चाहते हैं। हम अपनी समस्या का हल चाहते हैं। इस अवसर पर उपस्थित कवि विनोद कश्यप, कलीम खान ने भी अपनी अपनी रचना पढ़ी तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री रमेश चन्द्र मिश्र व भानु प्रताप द्विवेदी ने भी अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए योग दिवस पर अपनी कविता भी हम सबको सुनाया। अंत में संस्था के संरक्षक आदरणीय राम सागर राव जी ने उपस्थित समस्त कवि व साहित्यकार बंधुओं का आभार प्रकट किया और साहित्य के क्षेत्र में किये जा रहे सतत प्रयास की सराहना की।