ओ३म्
-कीर्तिशेष श्री सुखवीर सिंह वर्मा जी को श्रद्धांजलि-
“शतायु होकर दिवंगत हुए ऋषिभक्त सुखवीर सिंह वर्मा जी का जीवन अनुकरणीय एवं प्रेरणादायक है”
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वैदिक धर्म के अनुरागी एवं ऋषि दयानन्द सरस्वती जी के अनन्य भक्त श्री सुखवीर सिंह जी का जीवन प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है। उन्होंने अपने संयम एवं पुरुषार्थ से स्वस्थ रहते हुए 102 वर्ष की आयु को प्राप्त किया और कुछ दिनों के अल्पकालीन रोग के बाद दिनांक 15 जुलाई, 2025 को दिवंगत हुए हैं। आप स्वयं भी आर्यसमाज के सिद्धान्तों पर चले और अपनी सन्तान पुत्र श्री अशोक वर्मा जी को भी आर्यसमाज के संस्कार विरासत में दिए। आर्यसमाज सुभाषनगर, देहरादून का निर्माण भी आपने कराया था। इसके आजीवन सदस्य व अनेक प्रमुख पदों पर आपने कार्य किया। आर्यसमाज सुभाषनगर, देहरादून आर्यसमाज का देहरादून में एक प्रमुख समाज है जहां नियमित रविवारीय सत्संग आयोजित किये जाते हैं और वार्षिकोत्सव भी आयोजित किया जाता है। यहां एक पूर्णकालीक एक युवा पुरोहित हैं जो गुरुकुल पौंधा से शिक्षित एवं दीक्षित हैं तथा आर्यसमाज में यज्ञ आदि कार्यों को कराते हैं साथ ही निकटवर्ती आर्य परिवारों में समय-समय पर यज्ञ एवं संस्कार आदि कराया करते हैं। इस लेख में हम कीर्तिशेष आर्यपुरुष ऋषिभक्त सुखवीर सिंह वर्मा जी का परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं।
श्री सुखवीर सिंह वर्मा जी का जन्म पिता श्री मुख्तयार सिंह तथा माता श्रीमती रामदेई जी के यहां मेरठ के एक गांव जानजोखर में दिनांक 25 जुलाई, सन् 1923 में हुआ था। आपके परिवार में आपसे बड़े एक भाई, एक छोटा भाई तथा एक बहिन श्रीमती महिन्दर कौर जी थी। श्री सुखवीर सिंह वर्मा जी और उनकी धर्मपत्नी माता ब्रह्मकली जी के परिवार में उनका एक पुत्र अशोक वर्मा, पुत्र वधु श्रीमती शीला वर्मा, पौत्र श्री मनीष, पौत्र वधु श्रीमती नलिनी वर्मा तथा दो प्रपौत्र धनंजय एवं अश्वथ वर्मा हैं। आपकी एक पौत्री श्रीमती मनीषा एवं उनके पतिदेव श्री अमित शाहा हैं।
श्री सुखवीर सिंह वर्मा जी की प्राइमरी तक की शिक्षा ग्राम जानजोखर के स्कूल में तथा इसके बाद की शिक्षा डी.एन. हाई स्कूल, मेरठ में हुई थी। आपकी नियुक्ति राजयकीय सहकारी विभाग में आडीटर के पद पर हुई थी। इसी विभाग में कार्य करते हुए आपको कई पदोन्नतियां मिलीं। आप सहकारी विभाग के बिजनौर, बरेली, मेरठ, फैजाबाद एवं देहरादून में स्थित अनेक कार्यालयों में कार्यरत रहे। आपने देहरादून में डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक में प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) के पद पर कार्य किया। इसी विभाग से आपकी सेवानिवृति सन् 1983 में अतिरिक्त जिला कोआपरेटिव अधिकारी के पद से हुई थी।
विभागीय स्थानान्तरण पर देहरादून आने पर आपने देहरादून के विभिन्न स्थानों रेसकोर्स, घोसीगली, लक्ष्मण चैक सहित सुभाषनगर में निवास किया। घोसीगली में आपने लगभग 20 वर्ष तथा लक्ष्मरण चौक में लगभग 6 वर्ष तक निवास किया। सुभाषनगर में आपने सन् 1988 में एक पौश इलाके में कोठी ली थी। तब से मृत्युपर्यन्त आप अपने परिवार सहित सुभाषनगर वाले अपने निवास पर ही रहते रहे। आपने आर्यसमाज सुभाषनगर सहित सुभाषनगर से कुछ दूरी पर स्थित चन्द्रबनी शमशान घाट के निर्माण में सक्रिय सहयोग दिया था। आर्यसमाज की जिलास्तर एवं प्रदेश स्तर की गतिविधियों से भी आप सक्रियता से जुड़े रहे। आप आर्य उप प्रतिनिधि सभा, देहरादून के कोषाध्यक्ष आदि पदों भी रहे। दो वर्ष के लिये आप आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तराखण्ड के प्रधान पद पर भी रहे। आपका जीवन एक कर्मयोगी का जीवन था। वागेश्वर, उत्तराखण्ड में आयोजित आर्य महासम्मेलन में आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तराखण्ड ने आपकी आर्यसमाज की सेवाओं के लिए आपको सम्मानित किया था। आपने जीवन भर अपने निवास पर गाय पाली और गोमाता के दुग्ध का ही पान किया करते थे। वर्तमान में भी आपके घर पर भारतीय नस्ल की दो गायें हैं जिसका सारा दूध आपके परिवार जन अपने निजी उपयोग में लेते हैं। गायों की सेवा के लिए आपने पूर्णकालीक एक परिवार अपने यहां रखा हुआ है जो आपके निवास पर ही एक पृथक कक्ष में रहता है। आर्य परिवारों में गाय होनी चाहिये एवं आर्यों को गोदुग्ध का सेवन करना चाहिये, इस नियम का आपने जीवन भर पालन किया।
हम कीर्तिशेष श्री सुखवीर सिंह वर्मा जी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हैं और उनकी आत्मा की सद्गति के लिये ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। ओ३म् शम्।
-मनमोहन कुमार आर्य