*शिव अनुराग जीवन त्याग*
हे नाथ तुम्हारी वंदना
करते हैं अभिमान से
महाकाल जब रक्षक हैं तो
डरना क्या फिर काल से
हे त्रिपुरारी त्रिनेत्रधारी त्रिलोकी
हे त्र्यंबकं
हर सांस की आस लगी तुमसे
तुम प्रिय हो मेरे प्राण से
हे विश्वेश्वर हे परमेश्वर तुम
शक्ति संयोग की अनुपम धारा
हे नीलकंठ हे नटराजन
हम दिन दुखियों का तुम ही सहारा
इस जीवन का सार है तू
मेरा सारा संसार है तू
जब जब तेरी लगन लगे
तो दिल बेचैन सा होता है
दुनिया भर की ठोकर खाकर
मन व्याकुल सा रोता है
तेरे चरणों पे गिरकर
जब धैर्य भी आपा खोता है
तब हरने मेरे कष्ट क्लेश को
तुम आशुतोष बन आते हो
मेरी आंखों पर छाया माया का
जाल हटाते हो
भवसागर में फंसी जो नैया
पतवार तुम ही बन जाते हो
गिन गिन जो सांसे पाई हैं
तुझको ही सुमिरन किया करूं
ऐसी कृपा बरसा दो बाबा
तेरा ही नाम लिया करूं
हे महादेव कुछ दया हो ऐसी
मन शांत शिवाला किया करूं
सारे जग का अमृत तज कर
विष का प्याला पिया करूं
नहीं मांगती सुख संपत्ति
न कष्ट क्लेश से मुक्ति हो
न मै चाहूं स्वर्ग सलोना
न रावण सी शक्ति हो
मै तो देखूं सपन सलोना
कैलाशपति की भक्ति हो
तेरा तुझको अर्पित
बस इतनी चाह समर्पित हो
तेरे चरणों में हे अविनाशी
वृन्दा की जगह सुनिश्चित हो
**प्रज्ञा शुक्ला वृंदा*
लखनऊ उत्तर प्रदेश*